ललितपुर। जैन संत ने कहा कि भौतिकता की चकाचौंध में युवा खोता जा रहा है, जो चिंता का कारण है।
श्री अटा जैन मंदिर में चल रही ग्रीष्मकालीन वाचना में संत उपाध्यायश्री निर्भय सागर महाराज ने कहा कि साधु को चिंता नहीं होती, बल्कि उसके मन में जगत का चिंतन होता है। चिंता जीवन को चिता बनाती है तथा चिंतन चेतन जगाता है। संसार के कल्याण की भावना साधु का नि:स्वार्थ भाव होता है, जबकि गृहस्थ को परिवार की चिंता स्वार्थ पूर्ण होती है। आज श्रद्धा, भक्ति और योग साधना का दौर समाप्त हो रहा है, जबकि धन, दौलत और विषय भोगों का दौर गति पकड़ रहा है। लोगों ने धर्म को छोड़कर धंधा शुरू कर दिया है। भौतिकता की चकाचौंध के कारण युवा वर्ग धर्म से विमुख हो रहा है, जो चिंता का कारण है। युवाओं का धर्म से विमुख होने पर भारतीय संस्कृति को खतरा बढ़ रहा है। पुरुषार्थ करके धन कमाना चाहिए।
धर्मसभा में अनिल अंचल, डा. अक्षय टडै़या, शीलचंद्र अनौरा, प्रदीप सतरवांस, डा. सुनील संचय, अक्षय अलया, अज्जू भैया, अखिलेश, मुकेश जैन सर्राफ, धन्यकुमार, सतीश नजा, कामरेड जिनेंद्र जैन, भागचंद जैन, विनोद कुमार कामरा, सुशीलाबाई, प्रियंका, सनत जैन आदि मौजूद रहे।