ललितपुर। मोबाइल के जरिए बाहरी दुनिया से जुड़ने की युवाओं की जिद उनके भविष्य को बर्बाद कर रही है। साथ ही अपनों को जिंदगीभर का गम दे रही है। मोबाइल न दिलाने से नाराज होकर एक महीने में जिले में दो युवा अपनी जान दे चुके हैं। मनोविश्लेषक ऐसे मामलों में परिजनों को अपने बच्चे पर नजर रखने और सकारात्मक करने की सलाह दे रहे हैं।
जिले में 18 दिन में एक किशोरी और एक किशोर ने मोबाइल नहीं मिलने पर जान दे दी। थाना गिरार अंतर्गत ग्राम गर्रौली निवासी चंदा (15) पुत्री गनेश ने कैंसर से बीमार पिता से मोबाइल की फरमाइश कर डाली, लेकिन बीमारी से परेशान पिता ने मोबाइल दिलाने में लाचारी जताई। मगर बेटी ने फरमाइश पूरी नहीं होने पर कीटनाशक का सेवन कर लिया था। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई थी।
वहीं अब रविवार को महरौनी क्षेत्र के ग्राम छायन निवासी पुष्पेंद्र (17) ने भी यही कदम उठाया। इससे साफ है कि नई पीढ़ी के युवाओं में रिश्तों की अहमियत कम होती जा रही है। बाहरी दुनिया से जुड़ने की जिद में वे जान गवां दे रहे हैं।
बच्चा कोई कदम उठाने से पहले भी अपनी मांगे मनवाने को कहता होगा। अगर मांग पूरी न होने पर वह खुद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करे या इस प्रकार की बातें करे तो उसे नजरअंदाज न करें। बच्चों के जिद करने पर उनसे सकारात्मक बातें करें और गतिविधियों पर नजर रखें।
- संजीव कुमार शर्मा, मनोविश्लेषक, नेहरू महाविद्यालय