फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lalitpur News: रोजगार की तलाश में गैर प्रांतों में बंधक बन रहा जिले का मजदूर

विज्ञापन
विज्ञापन
बिचौलियों के जाल में फंसकर परिवार समेत पलायन, तीन मामलों ने खोली व्यवस्था की पोल
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर । जिले में रोजगार के ठोस साधनों और उद्योगों के अभाव में ग्रामीण मजदूर वर्ग रोजी-रोटी की तलाश में बिचौलियों के चंगुल में फंसकर गैर प्रांतों का रुख कर रहा है। वहां ठेकेदारों द्वारा उन्हें बंधुआ मजदूरी के लिए मजबूर किया जा रहा है। बीते एक वर्ष में ऐसे तीन मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें जिला प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई से मजदूरों को मुक्त कराकर वापस लाया गया। इन घटनाओं के बाद जिले में पलायन, रोजगार और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ललितपुर जनपद में तीन तहसील, छह ब्लॉक और 415 ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन रोजगार के स्थायी साधन न के बराबर हैं। उद्योग-धंधों और स्थानीय श्रम अवसरों की कमी के चलते गांवों में रहने वाला मजदूर वर्ग मजबूरी में महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में निर्माण स्थलों, कृषि क्षेत्रों और ईंट-भट्ठों पर काम करने जाता है।बिचौलियों द्वारा मजदूरों को 10 से 20 हजार रुपये तक का एडवांस देकर पूरे परिवार के साथ दूसरे राज्यों में ले जाया जाता है। वहां उन्हें किसी भी परिस्थिति में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। काम के दौरान मजदूरों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बेहद कम पैसा दिया जाता है। एडवांस राशि चुकाने के बाद भी उन्हें घर लौटने नहीं दिया जाता और मनमाने घंटे काम कराया जाता है।
विज्ञापन


एक साल में बंधुआ मजदूरी की तीन घटनाएं
पिछले कुछ महीनों में गैर प्रांतों में जिले के मजदूरों को बंधक बनाए जाने की तीन घटनाएं सामने आई हैं। तीनों मामलों में प्रशासन ने हस्तक्षेप कर मजदूरों को मुक्त कराया।


घटना-1: उस्मानाबाद से 34 मजदूर कराए गए मुक्त
ब्लॉक मड़ावरा के ग्राम पिसनारी और सकरा के 19 श्रमिकों समेत कुल 34 लोगों को महाराष्ट्र के उस्मानाबाद में 45 दिनों से बंधक बनाए जाने की शिकायत मिली थी। तत्कालीन जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के निर्देश पर संबंधित जिले से समन्वय स्थापित कर 9 फरवरी 2025 को सभी मजदूरों को सकुशल वापस लाया गया।

घटना-2: औरंगाबाद से सहरिया समाज के मजदूर लौटे
ब्लॉक जखौरा क्षेत्र के सहरिया समाज के करीब 34 मजदूरों को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में बंधक बनाकर काम कराने की शिकायत नंदीपुरा निवासी चउंवा सहरिया ने की थी। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से 15 नवंबर 2025 को सभी मजदूरों को वापस लाया गया। इनमें कारी पहाड़ी, टीकरा और नंदीपुरा गांव के महिला-पुरुष व बच्चे शामिल थे।

घटना : 3 पापड़ा व सोलदा के मजदूरों को बनाया गया था बंधक
मड़ावरा के ग्राम पापड़ा और सोलदा गांव के 17 मजदूरों को उनके परिवार के साथ कर्नाटक ले जाकर तीन महीने तक बंधक बनाकर काम कराया गया था। उनके 20 बच्चे भी वहीं रखे गए थे। परिजनों की शिकायत पर जिलाधिकारी ने कर्नाटक के बागलकोट जिला प्रशासन से रिहाई की बात कही थी। 9 जनवरी को मजदूर जनपद पहुंचे। उन्होंने बताया था कि किस प्रकार से वे वहां पहुंचे।

कर्नाटक से लौटे मजदूर, प्रशासन सक्रिय
कर्नाटक से मजदूरों के वापस लौटने के बाद प्रशासन अब उन्हें स्थानीय स्तर पर काम, सरकारी योजनाओं और अन्य सुविधाओं से जोड़ने की कवायद में जुटा है, ताकि दोबारा पलायन रोका जा सके।

करोड़ों के निवेश के दावे, रोजगार सीमित
जिले में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये के निवेश का दावा किया जा रहा है, लेकिन अधिकांश निवेश सोलर प्लांट परियोजनाओं में सिमटकर रह गया है। इससे स्थानीय स्तर पर सीमित लोगों को ही रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है।
विज्ञापन


मनरेगा भी नहीं रोक पा रही पलायन
गांवों में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही मनरेगा (वीबीजी राम जी) योजना भी पलायन रोकने में नाकाम साबित हो रही है।
जिले में 1,90,482 जॉब कार्ड, 3,11,273 पंजीकृत श्रमिक, 1,28,000 सक्रिय जॉब कार्ड और 1,90,299 सक्रिय श्रमिक हैं। मनरेगा में 252 रुपये की निर्धारित मजदूरी, काम की अनियमितता और भुगतान में देरी के कारण मजदूर गांव में रुकने के बजाय गैर प्रांतों में अधिक मजदूरी की आस में पलायन कर रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें