बानपुर। कस्बा बानपुर में चल रहे श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान के सातवें दिन एक हजार चौबीस अर्घ्य श्रीफल समर्पित किए गए। मुनिश्री सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि बिना बीज के फल की प्राप्ति नहीं होती है।
सुबह अभिषेक व शांतिधारा के उपरांत नित्य नियम पूजन किया गया। इसके बाद विधान के एक हजार चौबीस श्रीफल सहित अर्घ्य समर्पित किए गए। मुनिश्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि बिना बीज के फल की प्राप्ति नहीं होती, चाहे वह वृक्ष हो या मानव जीवन। वृक्ष कितना भी बड़ा हो। ऐसे ही मनुष्य को परमात्मा बनने के लिए छोटे से बीज की आवश्यकता होती है। हमें जिसकी इच्छा थी, खुद उसकी राह में हम नहीं चले। चार प्रकार के पुरुषार्थ बनाए, परंतु हमने धर्म और मोक्ष पुरुषार्थ को चाहा था। लेकिन, किया अर्थ और काम क्रिया तो कैसे फल मिलता। जब तुम चर्या नहीं करोगे, तुम्हारी अर्चा कैसे होगी। हम स्वयं तो सम्मान पाने की इच्छा रखते हैं, परंतु दूसरों को सम्मान नहीं देते। यदि खुद को बड़ा बनाना चाहते हो तो बड़ों के पास जाना शुरू कर दो। मनुष्य बनकर मनुष्यता को धारण करके परमात्मा बनना बड़ा कठिन है।
उन्होंने कहा कि लोग दिखावा करते हैं। मायाचार्य करते है और उसका फल त्रियंच है। उसे लोग जानते हैं, पर मानते नहीं हैं। ऐसे ज्ञान का क्या अर्थ? ज्ञान अगर स्वयं के करम से नहीं लग रहा है तो सब दिखावा है। दूसरो को समझाने में हरपल ज्ञान देते हैं, पर स्वयं उसका पालन नहीं करते। वास्तव में बिना चर्या के चर्चा नहीं हो सकती, बिना चर्चा के चर्या नहीं हो सकती। वास्तव में यही मनुष्य का पर्याय है, बीज है परमात्मा बनने को। परंतु हमने इस बीज को खो दिया। पाप को कोई नहीं चाहता है, परंतु पाप को छोड़ता नहीं। पुण्य का फल सब चाहते हैं, परंतु करते नहीं। आज यही दिखावा चल रहा है। धर्म का विलोप हो रहा है। आज मकान बनाना आसान है, पर घर बनाना कठिन है। क्योंकि जहां माता पिता और संस्कार हों, वही घर है। वही धर्म है। मकान बना लो सुंदर, परंतु घर से सुंदर धर्म होता है। धर्मात्मा का लक्ष्य गले मिलना नहीं, एक- दूसरे के मन मिल जाए, वही धर्मात्मा है। इस अवसर पर सभी इंद्र - इंद्राणी ने सैकड़ों की संख्या में भाव सहित सिद्धचक्र मंडल पर अर्घ्य समर्पित किए।
अतिशय क्षेत्र बानपुर का वार्षिक मेला व शांतिनाथ भगवान का महामस्ताकाभिषेक 18 मार्च को होगा। रथ शोभायात्रा निकाली जाएगी।