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Lalitpur News: ...जब रामभक्तों ने ठुकरा दी थी जेल से रिहा करने की शर्त

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। राम मंदिर आंदोलन के लिए रामभक्तों ने काफी संघर्ष किया। पुलिस की लाठियां खाईं और जेल भी गए। इन्हीं में तत्कालीन भाजपा नेता व वर्तमान सदर विधायक रामरतन कुशवाहा, पूर्व विधायक स्वर्गीय डॉ अरविंद जैन, पूर्व विधायक स्व. रामकुमार तिवारी और बीके सरदार शामिल हैं। जिन्होंने अन्य रामभक्तों के साथ उरई जेल में रात काटी और यहां से रिहा करने की शर्त को ठुकरा कर जेल प्रशासन की प्रताड़ना को सहा। अब मंदिर का भव्य निर्माण होने और प्राण प्रतिष्ठा होने पर इनकी आंखों में खुशी के आंसू हैं।

राजमाता विजयाराजे सिंधिया को छोड़ने जाते समय हुए थे गिरफ्तार
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे भाजपा नेता व वर्तमान सदर विधायक रामरतन कुशवाहा ने बताया कि 1992 में राम मंदिर का आंदोलन चरम पर था। आंदोलन को धार देने के लिए सिंधिया घराने की राजमाता विजयाराजे सिंधिया जनपद आई थीं। वह व डॉ अरविंद जैन, रामकुमार तिवारी और बीके सरदार अन्य साथियों के साथ उन्हें छोड़ने के लिए जब इलाइट चौराहे पर पहुंचे तो उनको गिरफ्तार कर लिया था। यहां से अन्य कारसेवकों के साथ उरई जेल भेज दिया गया था।
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राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए गिरफ्तार कर अन्य रामभक्तों के साथ उरई जेल भेज दिया था। यहां पर उन लोगों को तत्कालीन एसडीएम उरई जेल से रिहा करने को लेकर एक शर्त रखी थी, जिसे सभी रामभक्तों ने ठुकरा दिया था। अब जब राम मंदिर का भव्य निर्माण हो रहा है तो इसकी अपार खुशी मिल रही है। साथ में अपने ऐसे साथी जोकि अब इस दुनिया में नहीं है उनकी याद आती है।
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राम मंदिर आंदोलन के दौरान हजारों रामभक्त अयोध्या जाते थे। राम भक्तों को प्रशासन से लेकर पुलिस की प्रताड़ना भी डिगा नहीं सकी। अन्य रामभक्तों के साथ उन पर भी रासुका लगाई गई। उन्हें उरई जेल में अन्य साथियों के साथ बंद रखा गया था। अब जब मंदिर का सपना साकार हो रहा है और भव्य निर्माण के साथ प्राण प्रतिष्ठा हो रही है तो काफी खुशी मिल रही है। जल्द ही वह परिवार सहित अयोध्या जाकर मंदिर को देखेंगे और रामलला के दर्शन करेंगे।- बीके सरदार

राम मंदिर आंदोलन में उनके पिता पूर्व विधायक अरविंद जैन ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। गिरफ्तार होकर उरई जेल में बंद रहे और यहां हुए लाठी चार्ज में घायल भी हुए थे। अब जब उनके पिता का मंदिर निर्माण का सपना साकार हो रहा है तो उन्हें खुशी मिल रही है। अब उनके पिता इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन राम मंदिर निर्माण के लिए उनके द्वारा किए गए संघर्ष पर उन्हें व उनके परिवार को गर्व हो रहा है। जल्द ही वह पूरे परिवार के साथ अयोध्या जाएंगे और राम मंदिर के दर्शन करेंगे।-नीरज जैन, गौना
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1980-90 के दशक में आंदोलन जब चरम पर था तब अन्य राम भक्तों के साथ उनके पिता पूर्व विधायक रामकुमार तिवारी सक्रिय भूमिका निभाते थे। इसको लेकर जिला प्रशासन से लेकर पुलिस की प्रताड़ना सही, लेकिन अन्य रामभक्तों की तरह उनके पिता के राम मंदिर निर्माण के संकल्प को डिगा नहीं सके। अब उनके पिता इस दुनिया में नहीं है। मंदिर निर्माण को लेकर उनके संघर्ष से उन्हें व उनके परिवार को गर्व है। वह जल्द ही अयोध्या जाकर रामलला और राम मंदिर के दर्शन करने का सौभाग्य हासिल करेंगे।- निखिल तिवारी
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