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समर्थन मूल्य से कम दामों में खरीदा गया गेंहू

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गल्ला मंडी में लगी गेहूं बेचने को भीड़ - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। किसानों को गेहूं का उचित मूल्य देने के लिए शासन ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। लेकिन, लॉकडाउन की वजह से किसानों को गेहूं बेचने की जल्दबाजी में पहले दिन गल्ला मंडी में गेहूं 17 सौ रुपये से लेकर 1770 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचा गया।
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ग्रामीण क्षेत्रों के कई किसान अपनी उपज को लेकर बेचने के लिए पहुंचे। उन्होंने अपने वाहन नीलामी चबूतरा के पास खड़े कर दिए। जैसे ही गल्ल मंडी में व्यापारियों ने गेहूं की नीलामी प्रक्रिया पर खरीद शुरू हुई। गेहूं के लिए 17 सौ रुपये से यारूआत हुई। अंत में 1770 रुपये तक डाक बोली गई। बोली सुनकर किसान मायूस हो गए। आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान मजबूरन ही सस्ते दामों पर गेहूं बेचकर चले गए।
लॉकडाउन की वजह से कारोबार ठप चल रहा है। नवीन गल्ला मंडी को बंद करके उसके स्थान पर विशिष्ट गल्ला मंडी अमरपुर में कारोबार शुरू किया गया है। पहले दिन सोमवार को बड़ी संख्या में किसान मंडी पहुंचे। कुछ किसान गेहूं लेकर भी बेचने पहुंचे। हालांकि, शासन ने समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदने की घोषणा की है। इसके लिए 15 अप्रैल से गेहूं की खरीद होगी। लेकिन, किसानों को गेहूं बेचने की जल्द की वजह से उन्होंने समर्थन मूल्य का इंतजार नहीं किया और दो सौ रुपये कम दामों में गेहूं बेच दिया।
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मंडी प्रशासन ने गेहूं खरीद को चुने 13 व्यापारी
गल्ला मंडी में व्यापारियों को गेहूं की खरीद के लिए अनुमति मंडी प्रशासन से लेनी होती है। इसके बाद ही मंडी में गेहूं की खरीद कर सकते हैं। सोमवार तक मंडी प्रशासन द्वारा केवल 13 व्यापारियों को गेहूं खरीद की अनुमति दी गई थी। कुछ लोगों का कहना है कि व्यापारियों की कमी के कारण किसानों को गेहूं के उचित दाम नहीं मिल सके हैं।
चहेतों को गेट पास देने का आरोप
कुछ व्यापारियों ने मंडी प्रशासन पर मंडी से हो रही गेेहूं की निकासी में चहेतों को गेट पास देने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि मंडी से प्रतिदिन एक दर्जन ट्रक लोड होकर निकल रहे हैं। जबकि, कई व्यापारियों केे गेट पास की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे व्यापारियों में रोष व्याप्त है।
सोमवार को आए दो दर्जन से अधिक वाहन
विशिष्ट गल्ला मंडी के खुलने की सूचना मिलने पर सोमवार को दो दर्जन वाहनों से किसान अपनी उपज बेचने के लिए आए। बीते दिनों से चल रहे लॉकडाउन के दौरान मंडी खुलने को लेकर किसानों में भ्रम था। इससे उपज नहीं बेच पा रहे थे। जैसे ही सोमवार को खुलने की जानकारी हुई, किसान उपज लाने से पहले मंडी खुली है या नहीं, देखने के लिए पहुंचे। इससे यहां पर सोशल डिस्टेसिंग नहीं बन पाई।
अभी सरकारी खरीद केंद्र खुलने में समय लग रहा है। रुपयों की अधिक आवश्यकता है। इसलिए मंडी में ही गेहूं बेच दिया है।
- सुखदेन
आर्थिक तंगी के चलते परिवार का पालन पोषण में परेशानी हो रही है। कई कार्यों के लिए पैसों की आवश्यकता पड़ रही है। पैसों के अभाव के चलते गल्ला मंडी में गेहूं बेच रहे हैं।
- हरप्रसाद कुशवाहा
कर्ज लेकर अपनी रबी की फसल को किया था। लॉकडाउन से अधिक परेशानी हो गई है। इससे कम दामों में ही गेहूं बेचने को मजबूर हैं।
- भागीरथ
गल्ला मंडी में किसानों की उपज को नीलामी प्रक्रिया के अंतर्गत खरीदा जाता है। इसमें गेहूं की गुणवत्ता को नहीं देखा जाता है। जो किसान नीलामी के दामों से संतुष्ट नहीं हैं, वह अपनी उपज को गेहूं क्रय केंद्रों पर बेच सकते हैं।
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- अनिल कुमार मिश्र
अपर जिलाधिकारी/ सभापति मंडी
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