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पाश्चात्य संस्कृति अपनाकर भूल कर रहे हैं युवा

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र्यिका श्री से आर्शीर्वाद प्राप्त करते भाषण प्रतियोगिता के चयनित प्रतिभागी - फोटो : LALITPUR
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मडावरा। आर्यिका रत्न अंतरमति माता ने कहा कि श्रेष्ठ जीवन की ऊंचाइयों को प्राप्त करना है तो समाज में समरसता की भावना जागृत कर वर्तमान पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि जब युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति से जुड़ेगी तभी आतंकवाद जैसी समस्याओं का समाधान होगा और अहिंसा धर्म की स्थापना होगी। वह धर्मसभा को संबोधित कर रही थी। इस मौके पर आज का युवा धर्म से दूर क्यों विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
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उन्होंने कहा कि आज युवाओं को पाश्चात्य संस्कृति से दूर होकर भारतीय संस्कृति को अपनाना होगा तभी देश महान बनेगा। हमें अपनी मातृभाषा हिंदी का सर्वाधिक प्रयोग करके उसका सम्मान बढ़ाना होगा। सोमवार को अष्टमी तिथि पर आर्यिका ससंघ के सानिध्य में आज का युवा धर्म से दूर क्यों विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें युवाओं ने अपने -अपने विचार रखकर कहा भारतीय संस्कृति हमें संस्कार सिखाती है और धर्म से जुड़ने का संदेश देती है। भाषण प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के सदस्यों द्वारा प्रतिभागियों में से चयन किया गया। जिसमें प्रथम स्थान हिमांशी जैन, प्रवीण शास्त्री, द्वितीय स्थान सुनील शास्त्री, अनुभव कपासिया, निवेश जैन एवं तृतीय स्थान पारस जैन, सिनी जैन जतारा, सांत्वना पुरस्कार किमी जैन, अंकित बजाज, राशि जैन, माही सिलौनिया द्वारा प्राप्त किया गया।
प्रतिदिन प्रवचन एवं धार्मिक कक्षा लग रही
वर्णीनगर मड़ावरा में आर्यिका रत्न 105 अंतरमति, अनुग्रहमति, अक्षयमति, निर्मदमति, ध्यानमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में धर्म प्रभावनापरक आयोजित चातुर्मास कार्यक्रम में आर्यिका ससंघ के सानिध्य में प्रतिदिन प्रवचन एवं धार्मिक कक्षा के साथ-साथ सायंकाल में पाठशाला के माध्यम से नन्हें-मुन्हें बच्चों को संस्कारित किया जा रहा है जिसके लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।
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