पुलवारा ललितपुर। अपनी सुंदरता और नाम के बलबूते दूर-दूर तक प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका चंदन वन विभाग की उदासीनता और लापरवाही के कारण गुमनामी का शिकार हो गया है। ललितपुर जिले को पर्यटन और प्राकृतिक सुंदरता के क्षेत्र में पहचान दिलाने में चंदन वन का विशेष महत्व रहा है। लेकिन आज के समय में उक्त चंदन वन अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।
ललितपुर जिले के कस्बा बार स्थित चंदन वन पांच हेक्टेयर की जमीन में फैला है। यह एकमात्र ऐसा वन है, जिसमें चंदन के पेड़ हैं। इसके कारण यह अपने आप में काफी अद्भुुत है।
करीब 20 वर्ष पूर्व इस वन में दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक ‘मुझे चांद चाहिए’ की शूटिंग हो चुकी है। एक समय ऐसा था जब यहां बड़ी तादाद में दूर दराज से सैलानी आते थे। वन में हजारों चंदन के पेड़ों के अलावा कई अन्य प्रजातियों के पेड़ मौजूद थे। यहां विभिन्न प्रकार के वन्य पशु और झरने सैलानियों को आकर्षित करते थे। लेकिन विभाग की उदासीनता ने चंदन के बेशकीमती पेड़ों को ठिकाने लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। साथ ही चंदन के अलावा अन्य बेशकीमती पेड़ शीशम अर्जुन की छाल जो दवाओं के निर्माण में विशेष काम आते हैं। उन्हें कटवाकर मोटे दामों में बेच दिए गए।
इन पेड़ों की जगह गुंज आदि पेड़ों को लगाकर इसे मिश्रित वन का रूप दे दिया गया। जहां पहले चंदन के पेड़ों की संख्या हजारों में थी। आज उन पेड़ों को उंगलियों पर गिना जा सकता है। इसके अलावा इस वन में बड़ी संख्या में हिरन, बारह सिंघा, मोर, चीतल, बंदर, नीलगाय आदि कई प्रजातियों के जानवर मौजूद थे। आज उनकी संख्या कागजों में भले ही कुछ और हो। लेकिन हकीकत में उनकी संख्या दहाई का अंक भी पार नहीं कर पा रही है। गौर करने वाली एक बात ये भी है कि जिले में पर्यटन स्थलों की पैरवी करने वाले एवं ‘टूरिज्म माय पैशन’ के बलबूते अपनी पहचान बनाने वाले कुछ व्यक्तियों जिन्होंने जिले के कई स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कराने में बढ़ चढ़ कर पैरवी की। लेकिन जिले का इकलौता सुंदरता का दूसरा नाम चंदन वन उजड़ता गया।
इस ओर किसी भी व्यक्ति का ध्यान नहीं गया। शासन द्वारा चदन वन के रख-रखाव के लिये लाखों रुपये भेजे गए। लेकिन जिम्मेदार कर्मचारियों ने पैसों को कागजों में दर्शाकर और वन में खानापूर्ति कर पैसों को डकार लिया गया। खास बात ये भी है कि चंदन वन की सुरक्षा के लिये दिन रात सुरक्षाकर्मी मौजूद रहे। ऐसे में जहाँ एक ओर चंदन के पेड़ कटते गए। वहीं, दूसरी ओर हिरन बारह सिंघा, मोर आदि जानवर भी खत्म होने की स्थिति में पहुंच गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर चंदन वन को फिर से सही तरीके से रखरखाव कर पुन: पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो यहां पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। इससे यहां के स्थानीय निवासियों को रोजगार भी मिल जाएगा।