ललितपुर। बाहुबलि नगर जैन कालोनी में भारतीय जैन मिलन के तत्वावधान में दशलक्षण महापर्व के उपलक्ष्य में आयोजित कवि सम्मेलन में श्रोता देर रात्रि तक कविता रस में डूबे रहे। इस दौरान शील जैन शास्त्री ने बेटियों के साथ हो रहे भेदभाव पर कविता के माध्यम से करारा व्यंग्य किया।
उन्होंने सुनाया कि " काये कर इतनी दुवाभांती, हम समझई नईं पा रये, बिटिया भई सो मौं उतर गऔ, लरका की दारै, बाजे बजवा रये"। केके पाठक ने अपनी रचनाओं में शृंगार रस भरा। कवि सतीश सरल व मनोज मोहक ने भक्ति परक कविताएं सुनाई। वरिष्ठ कवि सुदेश सोनी ने जैन धर्म के मर्म व आचार्य विद्यासागर जी की भक्ति से ओतप्रोत रचनाएं सुनाई। इससे पहले वरिष्ठ पत्रकार हुकुमचंद पवैया की उपस्थिति में महावीर वंदना से कवि सम्मेलन का आगाज हुआ। मोहनी महक ने वंदना सुनाई।
इस मौके पर सदर विधायक रमेश कुशवाहा, दिगंबर जैन पंचायत के महामंत्री अक्षय टडैया, संयोजक प्रदीप सतरवांस, शिक्षामंत्री संजीव मोदी, अजय बरया, हुकुमचंद पवैया पत्रकार, रवि चुनगी, जैन मिलन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश बाबू, प्रभात लागौन, वरिष्ठ शाखा प्रबंधक सनत खजुरिया, श्रेयांश जैन आयोजक मंडल में सुरेंद्र सिंघई, डा. स्वरूपचंद, ऋषभ सहारा, मनीष जैन शिक्षक, अरविंद अप्सरा, उत्तम जैन मिर्चवारा, दीपक सिंघई, संतोष मोदी उपस्थित रहे। अंत में आभार सुरेश बाबू ने व्यक्त किया। अध्यक्षता वयोवृद्ध कवि शिखरचंद मुफलिस व संचालन शील शास्त्री व कवि वीरेंद्र विद्रोही ने संयुक्त रूप से किया।