ललितपुर। साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी संगम द्वारा सोमवार को बसंत के आगमन पर कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इस दौरान कवियों ने रचनाओं से देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा।
काव्यपाठ की शुरूआत करते हुए रामकृष्ण कुशवाहा ने फूलों सी है सुगंधित मिट्टी मेरे वतन की, है जन्नत का नजारा आबो हवा चमन की...पंक्तियां पढ़कर वाहवाही बटोरी। रामस्वरुप नामदेव ने सुनाया कि कोयलिया कूक रही झूम रहीं डालियां, मस्ती में झूम रहीं गेंहूं की बालियां...।
वहीं, अशोक क्रांतिकारी ने धर्म खड़ा बाजार में मांगे सब की खैर, न मंदिर से दोस्ती न मस्जिद से बैर...दोहा सुनाकर सभी को धर्मनिरपेक्षता के रंग से सराबोर कर दिया। सरबर हिंदुस्तानी ने सुनाया कि फूलों कलियों से सजाया जब गया, मेरे यार का लगे अंदाज ही नया...। दतिया की बीना उपाध्याय ने सुनाया कि चाहे चारों ओर से तपती हवाएं होगीं, या फिर चारों ओर से छाई घटाएं होंगी....।
किशन सिंह बंजारा ने सात बरस में करी पांचवीं, नंबर आए टॉप, मंत्रीजी कई ऐसे बन गए जो हैं, अंगूूठा छाप...पढ़कर श्रोताओं को लोटपोट कर दिया। इसके अलावा सोनिया प्रभाकरन व शिखरचंद मुफलिस ने भी काव्यपाठ कर तालियां बटोरीं। संयोजन काका ललितपुरी ने किया।
इस दौरान रामकृष्ण कुशवाहा का सम्मान किया गया। इस मौके पर गेंदालाल सतभैया, राधेकृष्ण ताम्रकार, कमल चंद, रामगोपाल ताम्रकार, जमुना प्रसाद नामदेव, बृजेश ताम्रकार, सुमनलता, कमलेश, अशोक कुमार, रामप्रकाश शर्मा, राधेश्याम ताम्रकार,
मुन्नालाल, विनोद कुमार, भैयालाल, शिवशंकर, राजाराम खटीक, नंदलाल पहलवान, हरगोविंद अहिरवार, त्रिवेणी देवी, सोनाली सूर्यवंशी, पूरनचंद स्वर्णकार व मनीष कुशवाहा आदि मौजूद रहे।