ललितपुर। चंडीपीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि धरा पर भगवान नारायण सर्वव्यापी हैं। उनके स्मरण से भक्त का कल्याण होता है। वह मंगलवार को चंडी मंदिर के मंगल सभागार में भागवत कथा का वर्णन कर रहे थे। इससे पहले श्रद्धालुओं ने 17 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर पूजन व रुद्राभिषेक किया।
महामंडलेश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि अजामिल को नारायण का स्मरण करते मृत्यु के भय से मुक्ति मिल गई थी। भक्त प्रहलाद की भक्ति से अभिभूत होकर स्वयं नारायण ने नृसिंह अवतार लिया और हिरण्यकश्यप का वध कर प्रहलाद की रक्षा करते हुए धरा पर धर्म की स्थापना की। नवधा भक्ति के बारे में कहा कि शास्त्रों व वेदों में भक्ति के 9 प्रकार हैं। श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवनम, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य व आत्मनिवेदनम यह नवधा भक्ति कहलाती है। जो भक्त इस प्रकार से भक्ति करता है, उसका जीवन सफल हो जाता है। उन्होंने कहा कि संतों का संग पाकर जड़-मूर्ख व्यक्ति भी धर्म व सत्य की राह पर आ जाता है। संत उन्हें कहा जाता है, जो व्यक्ति को परमात्मा का प्रकाश दिखा दे, उसे आत्मा की ओर उन्मुख कर दे, सद्गुरु से परिचय करा दे। संतों का हृदय नवनीत के समान होता है। इस दौरान श्रीरामचरित मानस की महाआरती कथा यजमान गंधर्व सिंह लोधी ने किया। सरदार बीके सिंह, राजीव बबेले, राजनारायण पुरोहित, पवन राजा बुंदेला, विजय जैन, महेश श्रीवास्तव, विजय चौबे, बृजमोहन संज्ञा, अनूप मोदी, डाॅ विशाल जैन, राहुल शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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धूमधाम से कल निकलेगी भोले की विदाई यात्रा
सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण आयोजन के समापन पर गुरुवार को भोले की विदाई यात्रा निकलेगी। भोले की विदाई श्री सिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम से प्रारंभ होकर वर्णी चौराहा, तुवन चौराहा, सावरकर चौक होते हुए सुम्मेरा तालाब पर समाप्त होगी, जहां भगवान की महाआरती की जाएगी। यात्रा में देश के कई महामंडलेश्वर, साधु-संत भाग लेंगे।