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उड़द व सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंचा रहा खरपतवार

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कारीटोरन में उड़द की फसल में लगी घास दिखाते किसान - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। पिछले कई दिनों रुक-रुक कर हुई बारिश से ब्लॉक बार क्षेत्र के ग्राम कारीटोरन में उड़द की फसल खराब हो गई है, साथ ही रही सही कसर खरपतवार ने पूरी कर दी है। खेतों में फसल कम और खरपतवार चहुंओर दिखाई दे रहा है। इससे किसानों को भारी नुकसान होने का अंदेशा जताया जा रहा है।
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किसानों का कहना है कि पिछले दिनों रुक-रुक कर जिले में बारिश हुई है। इससे खेतों में घास तेजी से बढ़ गई है और उड़द के पौधे जहां के तहां रह गए हैं। जिन खेतों में गहराई थी, उनमें बारिश का पानी भरा रहा, जिससे फसल खराब हो गई। तमाम किसानों ने लेखपाल के माध्यम से खेतों में फसलों को हुए नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। किसान साल दर साल आपदा का शिकार होते चले आ रहे हैं। कभी सूखा और कभी बारिश की मार झेलते चले आ रहे हैं। पिछली साल भी लगातार बारिश से किसानों की फसलें खराब हो गई थी। जिस पर सरकार ने किसानों को फसल बीमा व मुआवजा दिलाने का भरोसा दिलाया था। वहीं, बीमा कंपनी हर साल किसानों की फसल का बीमा काट लेती है और जब कोई आपदा किसानों पर आ जाती है तो बीमा कंपनी नियम कायदे बताकर किसानों को बीमा देने से हाथ खड़े कर देते हैं।
कई दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। जिससे तमाम खेतों में पानी भर गया है। इस वजह से उड़द की फसल खराब हो गई है। कइयों के खेतों में उड़द की फलियां अंकुरित हो आई है, उत्पादन काफी कम होने के आसार हैं।
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हरीराम विश्वकर्मा
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खेतों में घास और उड़द के झाड़ दिखाई दे रहे हैं, जिनमें फलियां तक नहीं आ है, जिससे खेतों में खड़ी फसल में कुछ भी निकलने वाला नहीं है। ऐसे में रबी फसल के लिए साहूकारों के सामने हाथ फैलाने पड़ेंगे।
रामकिशोर
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बारिश ने किसानों की फसल खराब कर दी है। जब बारिश की जरूरत थी, तब बारिश नहीं हुई और अब किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। इससे किसानों की तकलीफें बढ़ना तय माना जा रहा है।
अनुराग
किसानों से बीमा कंपनी छल कर रही हैं। वे बीमा देने में तमाम रोड़े अटकाते हैं, जिससे किसानों को बीमा के लाभ से वंचित होना पड़ता है। अभी भी तमाम किसान बीमा के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
रवि कुमार
मजदूरों के माध्यम से ही किसानों को खेतों से खरपतवार हटवाना होगा। इसके अलावा एक विकल्प और हो सकता है कि बाजार में कुछ कीटनाशक दवाएं ऐसी उपलब्ध हैं जो सात-घंटे बारिश नहीं होने पर डाल सकते हैं।
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गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी
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