ललितपुर। बुधवार को परिषदीय स्कूलों में होने वाले दूध वितरण के दौरान बेसिक शिक्षा अफसरों की अग्निपरीक्षा होगी। एक ओर जहां शिक्षक संघ दूध वितरण के फैसले को अव्यवहारिक बताते हुए उसका विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डीएम ने शासन के निर्देशों का अक्षरश: पालन कराने के लिए अधिकारी नामित कर दिए हैं। इस स्थिति में बेसिक शिक्षा अफसरों की मुश्किलें आसान दिखाई नहीं दे रही हैं।
शासन ने राजकीय, सहायता प्राप्त और परिषदीय विद्यालयों में संचालित मिड-डे मील योजना के मेन्यू में परिवर्तन कर दिया है। अब हर बुधवार को स्कूलों में दूध वितरित किया जाना है। इसका अधिकांश शिक्षक संघ विरोध कर रहे हैं। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विनोद निरंजन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम को देकर 10 रुपये प्रति विद्यार्थी के हिसाब से अग्रिम धनराशि दिलाने की मांग की। उन्होंने डीएम को दिए ज्ञापन में कहा कि शासन से प्राइमरी स्तर पर 3.86 रुपये एवं जूनियर स्तर पर 5.78 रुपये प्रति विद्यार्थी कन्वर्जन कास्ट प्रदान की जा रही है। इस मामूली धनराशि में कोफ्ता- चावल दे पाना ही संभव हो पा रहा है। वर्ष 2013 के फरवरी व मार्च माह के प्राथमिक स्तर की कन्वर्जन कास्ट अभी तक अप्राप्त है।
वहीं, उत्तर प्रदेशीय पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष मो. अजमल खान ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन डीएम को देते हुए कहा कि वर्तमान में दूध 50 रुपए लीटर बिक रहा है। ऐसे में मामूली सी कन्वर्जन कास्ट में दूध का वितरण किया जाना संभव नहीं है। उन्होंने इस अव्यवहारिक निर्णय को वापस लेने की मांग की है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष रविकांत ताम्रकार ने भी मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मिड-डे मील एनजीओ को देने की मांग की है। इसके अलावा भी शिक्षक धड़ों में एकत्रित होकर दूध वितरण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। हालांकि, अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। जिलाधिकारी जुहेर बिन सगीर ने शासन की मंशा को पूरा कराने के लिए अधिकारी नामित कर दिए हैं।
दिन भर शिक्षक रहे परेशान
ललितपुर। दूध के इंतजाम के लिए मंगलवार को शिक्षक दिन भर परेशान रहे। स्कूल से लौटने के उपरांत शिक्षकों ने दूधियों से संपर्क साधा और उन्हें बुधवार को दूध देने की बात कही। इस दौरान कइयों को मायूसी हाथ लगी। कई शिक्षक पैकेट बंद दूध की भी जानकारी लेते देखे गए तो कइयों ने डेरियों पर भी दूध के लिए संपर्क साधा।
कोफ्ता से पहले बंटेगा दूध
शासन ने दूध वितरण के लिए समय तय कर दिया है। नए निर्देशों के क्रम में स्कूल खुलने के पश्चात दूध का वितरण किया जाएगा। उसके उपरांत कोफ्ता का वितरण होगा।
कैसे होगा दूध का इंतजाम?
शिक्षकों के मन में एक सवाल कौंध रहा है कि सैकड़ों लीटर दूध का इंतजाम कैसे होगा? जिले में कोई बड़ी डेयरी नहीं है। छोटी-छोटी डेयरी ही काम कर रही हैं। जानकारों का कहना है कि यदि वास्तव में सभी स्कूलों में शत-प्रतिशत बच्चों को दूध का वितरण हो गया तो नगर के होटलों पर दूध की कमी पड़ जाएगी।