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वेबसाइट तैयार, जनता के लिए बेकार

Sun, 29 Jan 2017 12:23 AM IST
lalitpur
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कम्‍प्‍ायूटर - फोटो : demo pic
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नगर पालिका में ई-गवर्नेंस सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से अमृत योजना के तहत विभाग की वेबसाइट तो तैयार कर ली गई है, लेकिन अभी तक ऑनलाइन सेवाएं चालू नहीं की गई हैं। इससे शासन की मंशा पूर्ण होती नजर नहीं आ रही है। वहीं जनता भी इसका लाभ नहीं उठा पा रही है। वर्तमान में इस वेबसाइट का उपयोग नगर पालिका के अधिकारी खुद के प्रचार-प्रसार के लिए कर रहे हैं।      
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भारत सरकार द्वारा शहरों के विकास के लिए संचालित अटल मिशन फार रिजुवेशन एवं अरबन ट्रांसफार्मेशन (अमृत) योजना में सरकार की प्राथमिकता शतप्रतिशत नगर निकायों को आनलाइन करने की है। इसके पीछे शासन का मुख्य उद्देश्य यह है कि जनता को अपने कार्यों के लिए कार्यालय के चक्कर न काटना पड़े और विभागीय कार्यों में भी पारदर्शिता आए। बीते वर्ष 2016 माह फरवरी में शासन ने नगर पालिका के अधिकारियों की बैठक कर माह मार्च 2016 तक विभाग की वेबसाइट तैयार कराने के आदेश दिए थे। शासन की मंशा थी कि नवीन वित्तीय सत्र 2016-17 से नगर पालिका में ई-गवर्नेंस लागू हो सके, लेकिन नगर पालिका शासन की मंशा पर खड़ी नहीं उतर सकी है।


नगर पालिका द्वारा शुरुआती दौर से ही इस ओर खास दिलचस्पी नहीं दिखाई इसी का परिणाम है कि एक अप्रैल 2016 से ऑनलाइन होने वाली नगर पालिका की वेबसाइट की माई माह में तैयार हो सकी थी और वेबसाइट को बने हुए भी सात-आठ माह बीत चुके हैं व अगला नवीन सत्र आने वाला है, लेकिन अभी तक वेबसाइट को ई-गवर्नेंस के लायक तैयार नहीं करा पाई है। बताते चलें कि प्रदेश की समस्त निकायों में वेबसाइट बनाने के लिए शासन स्तर से ही साफ्टवेयर कंपनी उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपी डेसको) को नामित किया गया है। नगर पालिका वेबसाइट बनाने के लिए 5.85 लाख रुपये का अदा भी कर चुकी है। अब कंपनी को वेबसाइट पर ई-गवर्नेंस के लिए अलग से साफ्टवेयर अपडेट करना है। नगर पालिका ने हाल ही में कार्यदाई कंपनी यूपी डेसको को पत्र भेजकर साफ्टवेयर अपडेट करने के लिए व्यय का ब्योरा मांगा था, जिसके जवाब में कंपनी ने कुल 15 लाख रुपये का ब्योरा नगर पालिका थमा दिया है। अब नगर पालिका आचार संहिता हटने का इंतजार कर रही है, ताकि बोर्ड बैठक आयोजित करके उक्त व्यय को बोर्ड से मंजूरी मिल सके और इसके बाद कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके। बताते चलें कि कंपनी ने 15 लाख रुपये लागत का जो ब्योरा नगर पालिका को भेजा है उसमें जल संस्थान और विनियमित प्राधिकरण का भी उल्लेख किया गया है। इसका मतलब यह है कि नगर पालिका जो वेबसाइट अपडेट की जाएगी उसमें जल संस्थान और विनियमित प्राधिकारी को भी उससे जोड़ा जाएगा।      
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नहीं मिल पा रहीं यह सुविधाएं      
ऐसी मंशा थी कि http://npplalitpur.in पर क्लिक करते ही नगर पालिका परिषद ललितपुर कंप्यूटर व मोबाइल की स्क्रीन पर आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। यदि नगर पालिका ई-गवर्नेंस हो जाएगी तो इसका सबसे ज्यादा फायदा आम जनता को होगा। इस वेबसाइट के माध्यम से जनता अपनी समस्याओं व शिकायतों को ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के अलावा ग्रहकर व अन्य शुल्क को ऑनलाइन अदा कर सकेंगे, इसके अलावा वेबसाइट पर विभाग की संपूर्ण जानकारी व शासन की योजनाएं अपलोड की जा रही है। निर्माण कार्यों के टेंडरों की सूचना व आनलाइन टेंडर प्रक्रिया, ठेका नीलामी, सार्वजनिक सूचना, विज्ञापन, आय-व्यय का ब्योरा, पालिका की चल-अचल संपत्ति, सड़कों व नालियों की जानकारी, बजट व अन्य सभी जानकारियों को आनलाइन कर दिया जाएगा। लेकिन इन सुविधाओं का लाभ व यह जानकारियां जनता तक नहीं पहुंच पा रही हैं। वर्तमान में इस वेबसाइट का उपयोग केवल विभागीय अधिकारी अपने गुड वर्क का प्रचार-प्रसार करने में कर रहे हैं। नगर पालिका द्वारा शहर में चलाए जा रहे स्वच्छता जागरूकता अभियान, स्वच्छ भारत मिशन के तहत चलाए जा रहे अभियान व आयोजित किए जाने वाले शिविर की फोटो अपलोड किए जा रहे हैं।      
 
पूर्व में कंपनी से खर्च का ब्योरा मांगा गया था, लेकिन कंपनी ने हाल ही में दिसंबर माह में ब्योरा भेजा है। अब आचार संहिता लागू होने के कारण बोर्ड बैठक नहीं हो सकती है, इसलिए चुनाव के बाद ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
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- राकेश कुमार      
अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका ललितपुर।
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