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जल का संरक्षण करके पर्यावरण को बनाएं बेहतर

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पानी - फोटो : ????
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ललितपुर। विश्व भूगर्भ जल दिवस पर शहर के लोगों ने जल का संरक्षण करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में जल संकट व्याप्त है। दुनिया औद्योगिकीकरण की राह पर चल रही है, लेकिन स्वच्छ व रोग रहित जल मिल पाना कठिन होता जा रहा है।
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विश्व भर में साफ और पीने योग्य पानी की अनुपलब्धता के कारण ही जलजनित रोग महामारी का रूप ले रहे हैं। यह भी कहा जाने लगा है कि अगला विश्वयुद्ध जल को लेकर होगा। इंसान जल की महत्ता को लगातार भूलता चला जा रहा है और जल को बर्बाद कर रहा है, जिसके फलस्वरूप जल संकट सबके सामने है। पानी बड़ी समस्या बन गया है। विश्व भूगर्भ जल दिवस पर लोगों ने जल का संरक्षण करने की अपील की है।
जल को बचाने का करें प्रयास
प्रत्येक नागरिक को भूगर्भ से प्राप्त पानी की महत्ता से अवगत कराने के लिए विश्व भूगर्भ जल दिवस मनाया जाता है। पानी और पर्यावरण एक- दूसरे पर निर्भर हैं। पानी का संरक्षण करके पर्यावरण को बेहतर बनाया जा सकता है। पिछले कुछ दशकों में भारत सहित दुनिया भर में पानी का अंधाधुंध दोहन हुआ है। ऐसे में 2030 तक स्थिति ऐसी हो जाएगी कि जरूरत से आधा पानी ही मिलने की आशंका जताई जा रही है। संपूर्ण भारत देश में जल संकट के बादल मंड़रा रहे हैं। इसलिए पानी को बर्बाद होने से बचाने की जरूरत है।
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जल संरक्षण के उपाय
प्रत्येक नागरिक में जल संरक्षण हेतु जागरूकता लानी होगी। नागरिकों को शावर की जगह बाल्टी में पानी भरकर स्नान करना होगा। शेविंग करते समय नल बंद रखें। बर्तन धुलते समय नल के स्थान पर टब का प्रयोग करें। पानी को व्यर्थ में न बहाएं।
सभी को निजी स्तर पर जल का संरक्षण करना चाहिए। जल हमारी संस्कृति और संस्कार का हिस्सा है। हम समय के साथ - साथ सब कुछ भूलते जा रहे हैं। इसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि हमें पानी के संकट से जूझना पड़ रहा है। यदि इस संकट से उबरना है, तो पानी को आदर देना सीखना होगा। पानी को बचाने की शुरुआत निजी स्तर पर करनी चाहिए। - शीलचंद्र जैन, कवि
जल के बिना हमारा जीवन अधूरा है। आने वाला समय ऐसा न हो कि हमें जल युद्ध करना पड़े। पर्यावरण संतुलन इतना अधिक बिगड़ गया है कि जल संकट जैसी गंभीर समस्या हमारे सामने आ गई है। कहा भी गया है कि जल है तो कल है। जल के बिना हमारा जीवन बेकार है। जलस्तर बहुत नीचे पहुंच चुका है, जिस कारण से जल संकट के बादल छाए हुए हैं। - बृजेश कुशवाहा
हमारा देश ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से जूझ रहा है। लोगों ने पौधे लगाना कम कर दिए हैं। हमें आवश्यकता है कि हम अधिक से अधिक पौधरोपण करें। पौधरोपण से ही हम इस गंभीर समस्या से निपट सकते हैं। वृक्षों से ही अपनी धरती मां की गोद को खुशहाल रख सकते हैं। - मुकेश तिवारी, प्रधानाचार्य ग्राम उत्थान बालिका इंटर कॉलेज
वर्तमान परिवेश में धरती मां की गोद में कल-कल निनाद करती नदियां भी सूखी पड़ी है। लोगों ने पर्यावरण को इतना दूषित कर दिया है कि जल संकट जैसी समस्या देश के सामने आ गई है। 20-30 वर्ष पहले लोग अपने घर, खेत - खलिहान, गांव व बगीचों में पेड़-पौधे लगाया करते थे। उनका संरक्षण भी करते थे। इससे पर्यावरण सुरक्षित रहता था और वर्षा समय पर होती थी। - राजकुमार तिवारी
जब से पृथ्वी बनी है, पानी का उपयोग हो रहा है। ज्यों-ज्यों पृथ्वी की आबादी में वृद्धि एवं सभ्यता का विकास होता जा रहा है, पानी का खर्च बढ़ता जा रहा है। आधुनिक शहरी परिवार प्राचीन खेतिहर परिवार के मुकाबले छह गुना पानी अधिक खर्च करता है। मानव जिस गति से जलस्रोतों का अनुचित दोहन कर रहा है, वह भविष्य के लिए खतरे का संकेत है। - हरिशंकर सोनी
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