पाली (ललितपुर)। कस्बा पाली में पानी का संकट गहराया हुआ है। स्थिति यह है कि नल पांच से दस मिनट के लिए ही आ रहे हैं। दस में से छह वार्डों में निवास करने वाले लोग पानी के लिए परेशान हैं।
करीब 20 हजार आबादी वाले 10 वार्डों की नगर पंचायत पाली में करीब तीन दशक पहले जल निगम ने पाइप लाइन डाली थी। लोगों के घरों तक पेयजल पहुंचाने की जिम्मेदारी जल संस्थान को सौंपी गई दी थी। विभाग नए कनेक्शन तो बांटता रहा, लेकिन प्यासे वार्डों में पानी अब तक नहीं पहुंचा पाया है। विद्युत सेवा ठप होने पर कस्बे की पेयजल आपूर्ति पूरी तरह चरमरा जाती है। गर्मियों में पाली के चार वार्डों को छोड़कर शेष छह वार्डों में लोग पेयजल के लिए भटकते नजर आ रहे हैं। मुहल्ला टिपुआ, मुहल्ला हजारिया, मधुवापुरा, गांधी चौक और चौरसिया मुहल्ला में तो पांच से दस मिनट ही पानी आ रहा है, तो कहीं नलों से केवल हवा निकलकर रह जाती है। लोग पानी एकत्रित करने के लिए कड़ी मशक्कत करते रहते हैं। घटते जलस्तर के साथ कई हैंडपंपों ने साथ छोड़ दिया है तो कई हैंडपंप जंगयुक्त पानी छोड़ रहे हैं। जो हैंडपंप ठीक हैं, उन पर सुबह होते ही बर्तनों के साथ लंबी कतारें लग जाती है। नंबर आने पर ही लोग पानी भरते है। भीषण संकट के बाद भी न तो जल संस्थान और न ही नगर पंचायत टेंकरों के माध्यम से लोगों तक पानी पहुंचा रही है।
सूखे पड़े जलाशय, कुंआ हो गए प्यासे
पाली। आज से एक दशक पहले कुएं के पानी से ही लोग अपनी जरूरतों को पूरा करते थे। हैंडपंपों की संख्या बढ़ने से लोगों ने कुएं से दूरी बनानी शुरू कर दी। पनघटों पर भी सूनापन दिखाई देने लगा। परिणामस्वरूप उचित रखरखाव के अभाव में इनका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कभी लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाले कस्बा का नंदवानी कुंआ, चंद्र बावड़ी और बीयनवारा कुंआ उपेक्षा के कारण खुद प्यासे हो गए हैं। इसके अलावा नागोरी तालाब और रामसागर तालाब, जिनमें विचरण करने वाले मगरमच्छ लोगों में खौफ पैदा करते थे। आज यह जलाशय मैदान से नजर आ रहे हैं। पाली व उसके आसपास के कुछ लोगों का जीवन जलाशयों पर निर्भर था। यह लोग जलाशयों में पहुंच कर नाव के साथ जाल बिछाते थे। दोपहर से शाम तक जाल में जो मछली फंसती थी, उसे बाजार में बेच कर अपने परिवार की उदरपूर्ति का जरिया बनाते थे, लेकिन अब यह सब समाप्त होता जा रहा है।
कस्बे में पानी की आपूर्ति के लिए जल संस्थान के अधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत करा दिया गया है। नीलकंठेश्वर मार्ग पर एक नलकूप लगवाया गया है, जिससें पाइप लाइन बिछवाई जा रही है। काम पूरा होते ही लोगों के घरों तक पानी पहुंचाया जाएगा।
- अरविंद (राम) चौरसिया
पार्षद, नगर पंचायत पाली
पानी के लिए हाहाकार मचने लगा है। पाली व उसके क्षेत्र में कई हैंडपंप जंगयुक्त पानी उगल रहे हैं। लोगों के सामने पेयजल का संकट खड़ा है। पानी के नमूनों की जांच होनी चाहिए, जिससे लोग बीमारियों की चपेट से बच सके। साथ में हैंडपंपों के पास हौद बनाए जाए, जिससे जानवर भी अपनी प्यास बुझा सकें।
- पुष्पेंद्र चौरसिया, समाजसेवी