ललितपुर। शहर की जलापूर्ति को सुचारु बनाने में पाइप लाइनों के लीकेज रोड़ा साबित हो रहे हैं। विभिन्न मोहल्लों में जगह-जगह पाइप लाइनों में लीकेेज हैं, जिनसे कीमती पानी नालियों में बह रहा है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जलापूर्ति बाधित हो रही है।
जलसंस्थान शहर की आपूर्ति को सुचारु बनाने में अब तक नाकाम रहा है। इसकी वजह पाइप लाइन के लीकेज हैं। नईबस्ती में चंडी माता मंदिर के पीछे श्मशान घाट की ओर जाने वाली सड़क पर कई जगह पानी के फव्वारे छूट रहे हैं। इससे कीमती पानी बर्बाद हो रहा है। जो पानी लोगों को पीने के लिए मिलना चाहिए, वह नालियों में बह रहा है। कसाई मंडी व बीएसए कार्यालय के मध्य में पाइप लाइन से पानी बर्बाद हो रहा है। ऐसा नहीं है कि यह लीकेज आज के हों, कई पुराने लीकेजों को सुधारने की सुध नहीं ली जा रही है। कई उपभोक्ता भी आपूर्ति को बिगाड़ रहे हैं। तमाम कनेक्शन होने के बाद भी पाइप लाइन को ठीक नहीं करा रहे हैं। इससे सैकड़ों लीटर पानी प्रतिदिन नालियों में बहकर बर्बाद हो रहा है। गर्मी का सीजन आने से पहले मोहल्ला नेहरू नगर, चौबयाना, पुरानी बजरिया, गांधीनगर, नईबस्ती में एक घंटे तक नल आते थे, लेकिन अब आपूर्ति का समय घटकर दस से पंद्रह मिनट रह गया है। कहीं - कहीं तो पानी भी नहीं पहुंच रहा है। स्थानीय मोहल्ला के सुरेश और कनई का कहना है कि सुबह पानी की सप्लाई खुलती है तो चंडी मंदिर के पीछे श्मशान घाट की ओर जाने वाली सड़क पर नलों के कनेक्शनों से पानी बहते देखा जा सकता है।
श्मशान घाट के पास भी कुछ ऐसा ही नजारा रहता है। जिन उपभोक्ताओं के नल के कनेक्शनों से पानी फिजूल में बर्बाद होता है, वह उपभोक्ता नल की क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को ठीक नहीं करा रहे हैं। कुछ उपभोक्ता ऐसे भी हैं, जिन्होंने नल के कनेक्शन ले लिए हैं, लेकिन वह उस पानी का उपयोग नहीं कर रहे हैं। जब तक आपूर्ति होती है, तब तक पानी यूं ही बर्बाद होता रहता है। कुछ नल कनेक्शनों के पाइपों का मुंह नालियों में कर दिया गया है, जिससे सुबह की सप्लाई का पानी नालियों में बहता रहता है। यदि जल संस्थान के अधिकारी नईबस्ती, चंडी माता मंदिर के पीछे, श्मशान घाट की ओर जाने वाली सड़क पर पहुंचकर स्वयं देखें तो उन्हें पता चलेगा कि कैसे पानी की बर्बादी हो रही है। मोहल्ला नेहरू नगर के लोगों ने जिलाधिकारी से पाइप लाइनों के लीकेज ठीक कराने की मांग की है।
----
जिन क्षेत्रों में जलापूर्ति की समस्या है, उन जगहों की कमियों को दूर कर आपूर्ति को सुचारु बनाया जा रहा है।
- राहुल सिंह, अवर अभियंता, जलसंस्थान