- चौकीदार न कर्मचारी, शिक्षकों को बजाना पड़ता है घंटा
- स्कूल में विज्ञान लैब, लाइब्रेरी और खेलने का है सामान
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुुर। परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प करने में भले ही लाखों रुपये का बजट खर्च किया गया हो लेकिन अब भी अधिकांश स्कूलों में बारिश के दौरान पानी टपक रहा है। आलम यह है कि स्कूलों की फर्श पर टाइल्स तो लग गए लेकिन दीवारों में आईं दरार और छत के निकल रहे सरियां व्यवस्था के दावों की पोल खोल रहे हैं। इन स्कूलों में विज्ञान लैब, लाइब्रेरी और खेलकूद किट व झूले तो हैं, लेकिन जिन कक्षाओं में बच्चें पढ़ाई कर रहे हैं वहां टपक रहे पानी से उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। इन स्कूलों में न तो चौकीदार तैनात हैं और न ही अन्य कोई कर्मी जिससे घंटा बजाने का कार्य भी स्टाफ को करना पड़ता है। हालांकि इस संबंध में बीएसए रणवीर सिंह का कहना है कि पानी टपकने पर बच्चों को अन्य कक्षाओं में बैठाने की व्यवस्था कर दी है। साथ ही मरम्मत के निर्देश दिए हैं। पेश है कुछ स्कूलों की हकीकत बयां करती रिपोर्ट....।
मिर्चवारा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय का निर्माण वर्ष 1983 में कराया गया था। बारिश में यहां कक्षाओं से लेकर इंचार्ज प्रधानाध्यापक के कमरे की दीवार से पानी रिसने से सीलन आ है। स्कूल में पंजीकृत 62 बच्चों में 42 आए थे जो कि कक्षाओं में पढ़ते मिले। स्कूल में खेलकूद का सामान कुछ खुला तो कुछ बैग में बंद मिला। प्रभारी इंचार्ज इंद्रपाल ने बताया कि बच्चे खेलकूद में भाग लेते हैं जरूरत के अनुसार सामान निकाला जाता है। स्कूल में प्रभारी इंचार्ज सहित दो सहायक अध्यापक तैनात हैं। कमोड वाला शौचालय बना लेकिन उसका उपयोग नहीं किए जाने से गंदा पड़ा था। वहीं पीने के पानी की लिए लगी टोंटियां गायब थीं। स्कूल में लाइब्रेरी है लेकिन समाचार पत्र नहीं आते। बच्चे खाली समय में किताबें ही पढ़ते हैं। प्राथमिक विद्यालय नई बस्ती के मर्ज होने के बाद वहां के 41 में 35 बच्चे अतिरिक्त कक्ष में जमीन पर बैठे पढ़ रहे थे। प्रधानाध्यापक परवीन बानो ने बताया कि आज कुछ बच्चे कम आए हैं लेकिन, जल्द ही सभी बच्चे आएंगे। फर्नीचर की अभी व्यवस्था नहीं है। रसोइया एमडीएम में सब्जी चावल पका रहीं थी।
गांव पटसेमरा स्थित कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय के नए भवन का निर्माण वर्ष 2005 में हुआ था। इस विद्यालय में तीन अनुदेशक और सात शिक्षक तैनात हैं, इनमें एक शिक्षक जितेंद्र कुमार करीब पांच साल से नहीं आ रहे हैं। प्रधानाध्यापक ज्योति सोनी ने बताया कि वह बीआरसी बिरधा में संबद्ध हैं। विद्यालय में 50 जूनियर कक्षाओं के लिए फर्नीचर आ गया लेकिन अन्य बच्चे जमीन पर बैठ रहे हैं। इस विद्यालय में तीन कक्षाएं जर्जर हालत में हैं। इन्हीं कक्षाओं में बैठकर बच्चे पढ़ाई करते हैं। बारिश के दौरान इन कक्षाओं में पानी टपकता है। यहां लिंटर का प्लास्टर निकल गया और जंग लगे सरिया साफ दिखते हैं। बारिश अधिक होने पर स्कूल परिसर तो दूर प्रधानाध्यापक के कमरे में भी पानी भर जाता है। विद्यालय में पंजीकृत 187 बच्चों में 138 उपस्थित थे। खेलकूद का सामान व लाइब्रेरी होने का लाभ बच्चों को मिल रहा है।