ललितपुर। सूखा से जूझ रहे जनपद के लोगों ने पेयजल संकट से निपटने के लिए खुद ही मेहनत करना शुरू कर दिया है। इसका गवाह ब्लाक बिरधा के ग्राम बांसपुर का कुआं है। इसमें सहरिया आदिवासियों ने अपनी मेहनत के बल पर पानी निकाल लिया है।
ग्राम बांसपुर में सहारिया आदिवासियों की करीब डेढ़ सौ लोगों की बस्ती में लगे सभी हैंडपंप सूख चुके हैं। इस बस्ती के लोगों को पेयजल का एकमात्र साधन करीब तीन वर्ष पहले बना मनरेगा का कुआं था। करीब 20 दिन पहले इस कुएं का पानी सूख गया था। सरकारी योजना के तहत यह कुंआ करीब 20 फुट खोदा गया था। उस वक्त बस्ती के लोगों ने सरकारी कर्मियों से कुएं को थोड़ा और गहरा करने को कहा था, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
सूखे हैंडपंप व कुएं में पानी खत्म होने के बाद यहां पेयजल संकट पैदा हो गया था। गांव की दूसरी बस्ती में हैंडपंप पर पानी भरने के लिए सहरिया जाति की महिलाओं को अभद्रता का सामना करना पड़ रहा था।
आखिरकार, सहरिया बस्ती के लोगों ने इस कुएं को खुद ही गहरा करने का निर्णय लिया। बस्ती के लोग एकजुटता से कुएं के गहरीकरण के काम जुट गए। पहले दिन इन लोगों ने अपनी मेहनत से दो फुट कुएं को गहरा किया। दो फुट गहराई के बाद पानी निकलना शुरू हो गया, जिससे लोगों को अपनी मेहनत सफल होते दिखी। करीब 15 दिन लगातार काम करके सहरिया आदिवासियों ने 20 फुट गहरे कुएं को 32 फुट और गहरा कर दिया। आज की तारीख में कुएं में भरपूर पानी है और पूरी बस्ती आराम से इसका उपयोग कर रही है। इस कुएं को गहरा करने में कोई भी सरकारी मदद उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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स्थानीय प्रशासन अंजान, दिल्ली से सम्मान
बिना सरकारी मदद के डेढ़ सौ लोगों की बस्ती के लिए कुएं का गहरीकरण करने वाले सहरिया आदिवासियों के बारे में स्थानीय प्रशासन को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है और न ही कोई मदद उपलब्ध कराई गई है। लेकिन, मैगसेसे पुरस्कार प्राप्त गैर सरकारी संगठन ‘गूंज’ को जब इनके सराहनीय कार्य की जानकारी मिली, तो उन्होंने पूरी बस्ती के विशेष किट उपलब्ध कराकर उत्साहवर्द्घन किया। इस किट में पूरे परिवार के लिए कपड़े, जूते, चप्पल व बर्तन हैं। यह संस्था समाजहित में कार्य करने वाले लोगों और संस्थाओं को प्रोत्साहित कर उन्हें जरूरत के सामान उपलब्ध कराती है।