ललितपुर। शहर की पेयजल आपूर्ति सुदृढ़ नहीं हो पा रही है। इस वजह से स्थानीय नागरिकों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है। इस समय विभिन्न मोहल्ले की 35 हजार की आबादी पेयजल की समस्या से जूझ रही है। कोई साइकिल तो कोई हाथ ठेला तो कोई टैक्सी में प्लास्टिक के कुप्पा रखकर पानी भर रहा है।
शहर के वार्ड सिद्धनपुरा, नेहरू नगर, रैदासपुरा, चौबयाना, श्रद्धानंदपुरा, पुरानी बजरिया, आजादपुरा, गांधीनगर, देवगढ़ मार्ग के आसपास पेयजल संकट गहरा रहा है। पिछले सालों में जल संस्थान समस्याग्रस्त क्षेत्रों का चिह्नींकरण कर टैंकर से जलापूर्ति करता था लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में विभाग द्वारा मांग के आधार पर ही टैंकर भेजे जा रहे हैं। इस तरह रोजाना करीब दस से बारह फेरे टैंकर के लगाए जा रहे हैं जो नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसे में लोगों को हैंडपंप से पानी जुटाना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा विकट स्थिति नेहरू नगर की बनी हुई है। सुबह से मोहल्ले के लोग नलों के नीचे अपने बर्तन रखकर पानी आने का इंतजार करते हैं, जब बहुत देर तक नल नहीं आते हैं तो अपने बर्तन उठाकर हैंडपंपों पर पानी के लिए दौड़ पड़ते हैं। देखते ही देखते पानी भरने वालों की हैंडपंप पर भीड़ लग जाती है। रेलवे अस्पताल के पीछे की गलियों में कई दिनों से कभी दस मिनट तो कभी पंद्रह मिनट ही नल आ रहे हैं। नलों से आ रहे पानी में प्रेशर बिलकुल नहीं है। कई लोगों के नलों से मटमैला बदबूदार पानी आ रहा है। वहीं, क्षेत्र में कई दिनों से नल नहीं आ रहे हैं। कोई टैक्सी तो कोई हाथ ठेला तो कोई साइकिल पर कुप्पा टांगकर पानी भर रहा है।
----
ये है शहर की स्थिति
-शहर की आबादी डेढ़ लाख
-नल कनेक्शन- 13500
-शहर में स्थापित 1458 हैंडपंप
-आठ एमएलडी, दस एमएलडी, तेरह एमएलडी के तीन पंप हाउस
-----
काफी दूरी पर लगे हैंडपंपों से पानी भरना पड़ता है। यहां के लोगों को पानी भरने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। पहले इसी पाइप लाइन से एक घंटा नल आते थे और अब बिल्कुल भी नहीं आ रहे हैं।-रवि
----
नेहरू नगर में पानी का संकट है। रेलवे अस्पताल के पीछे की गलियों में पानी की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। मोहल्ले में दिनों-दिन पानी की समस्या बढ़ती ही जा रही है। नलों से मटमैला, बदबूदार पानी आने की भी शिकायत है।- विकास
---
छोटे-छोटे बच्चों को भी बड़ी दूर हैंडपंपों से पानी भरना पड़ रहा है। महिलाएं सिर पर बर्तन रखकर हैंडपंप से पानी भर रही हैं। हैंडपंपों पर पानी भरने के चक्कर में झगड़े भी हो जाता है। दिन-रात लोग डिब्बा लिए पानी भरते रहते हैं।-इंद्रा
---
खराब हैंडपंपों की मरम्मत में हो रही देरी से भी पेयजल की समस्या विकराल हो रही है। विभागीय अफसर वास्तविक स्थिति जानने के लिए शहर का भ्रमण नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति में दूर-दूर से पानी भरने के लिए लोग मजबूर हो रहे हैं।
सोनम
----
गर्मी के सीजन में मांग और आपूर्ति बिगड़ जाती है। विभाग के पास संसाधन सीमित है। शासन से पुनर्गठन के लिए पैसा मांगा गया है लेकिन अभी तक धन नहीं मिला है।-संजय निरंजन, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान