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168 गांवों में जल प्रबंधन के लिए चलेगा विशेष अभियान

Thu, 22 Dec 2016 12:29 AM IST
lalitpur
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प्रशासन - फोटो : amar ujala
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जल संसाधन मंत्रालय की ओर से बुंदेलखंड के चार जिलों ललितपुर, झांसी, टीकमगढ़ और छतरपुर में जल संरक्षण और जल सुरक्षा को लेकर एक योजना बनाई गई है। इस योजना को राष्ट्रीय जल विज्ञान केंद्र रुड़की व उप्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर लखनऊ द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा। इस परियोजना के समन्वयक डॉ. विकास गोयल की अगुवाई में वैज्ञानिकों के एक दल ने जनपद में प्रस्तावित कार्ययोजना को बुधवार को जनपद के अधिकारियों के समक्ष पेश किया। इस अभियान में 168 गांव लाभान्वित होंगे।
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कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में बताया गया कि कार्य योजना के तहत सजनाम नदी के कमांड एरिया का वॉटरशेड बनाया जा रहा है। साढ़े नौ सौ वर्ग किमी से अधिक के इस वॉटरशेड में तीन तहसीलों के चार ब्लॉकों में से 168 गांवों को चिह्नित किया गया है। इन चिह्नित गांवों में जल, जमीन और फसल को लेकर अभियान चलाया जाएगा। वॉटरशेड कार्यक्रम के तहत पहली बार स्थानीय लोगों के आजीविका को बढ़ाने के उपायों को भी जोड़ा जा रहा है। इस परियोजना के तहत पहले चरण में टीकमगढ़ में ऊर नदी पर पूरा प्रोजेक्ट तैयार स्थानीय प्रशासन को सौंप दिया गया है। अब स्थानीय प्रशासन इस कार्ययोजना के आधार पर पूरे जनपद में जल प्रबंधन व आजीविका को बढ़ाने के उपाय पर कार्य कर सकेगा। इसी तरह में ललितपुर में सजनाम नदी के कमांड एरिया में बनाए गए इस वॉटरशेड में एक मॉडल पेश कर पूरी जनपद की रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन को सौंप दिया जाएगा। जिस पर भविष्य में जिला निधि व राज्य निधि के जरिये कार्य किया जा सकेगा। इस अवसर पर सीडीओ प्रवीण कुमार लक्षकार, वैज्ञानिक टी थॉमस, डॉ. ज्योति पाटिल, डॉ. राजेश सक्सेना आदि मौजूद रहे।

पुस्तैनी कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ेंगे
परियोजना से जुड़ी जल विज्ञान केंद्र की डॉ. ज्योति पाटिल ने बताया कि इस वॉटरशेड परियोजना में जोड़े गए 168 गांवों के लोगों की आजीविका को बढ़ाने को लेकर प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों द्वारा अपनी पुस्तैनी कला के जरिये कई चीजों का निर्माण किया जाता है। उनकी इस कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा, जिससे उनके हुनर का प्रभावी इस्तेमाल किया जा सका। उदाहरण के तौर पर डॉ. पाटिल ने बताया कि बांस की कई कलाकृतियां बुंदेलखंड के गांवों में में बनाई जाती है, लेकिन तकनीक के अभाव में ज्यादा मात्रा के तौर पर इनका निर्माण करना संभव नहीं हो पाता है। कार्यक्रम के तहत आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर इन लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
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