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29.34 करोड़ से 11 गांव की बुझेगी प्यास

Tue, 14 Jul 2015 01:04 AM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
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ललितपुर। ब्लाक व तहसील तालबेहट के 11 गांव की प्यास बुझाने के लिए 29.34 करोड़ रुपये की लागत से 10 किमी लंबी पाइप लाइन डाली जाएगी। टेंडर प्रक्रिया होने के बाद जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए कार्यदायी संस्था जलनिगम लगातार प्रयास कर रही है।



विभागीय अधिकारियों की मानें तो कुछ ही सालों में अधिकांश गांवों में पाइप लाइन के माध्यम से पानी पहुंचना शुरू हो जाएगा। जलनिगम ने करीब 81 गांवों को पाइप लाइन से जोड़ने के लिए प्राक्कलन तैयार किया और शासन को भेज दिया। इसके सापेक्ष जल निगम को धीरे-धीरे धनराशि आवंटित की जा रही है। इसी क्रम में ब्लाक व तहसील तालबेहट अंतर्गत नत्थीखेड़ा ग्राम समूह पेयजल योजना में 11 गांव को जोड़ने का काम किया जाएगा।



29.34 करोड़ रुपये की लागत से 10 किमी लंबी पाइप लाइन बिछाई जाएगी। ग्राम झावर स्थित जामनी नदी से इंटेकबेल की सहायता से पानी लिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद पानी को स्टोर और साफ करने के बाद टंकियों को भरा जाएगा। टंकियों के माध्यम से ग्राम झावर, कांधारी कला, पूरा खुर्द, नत्थीखेड़ा, कांधारी खुर्द, हिंगौरा कलां, हंसार कलां, चुरावनी, करेंगा, ऐवानी व विजयपुरा तक पानी पहुंचाया जाएगा। शुरुआत में मुख्य पाइप लाइन 450 एमएम की होगी। इसके बाद पाइप लाइन ग्राम की आबादी के अनुसार 65, 100, 150, 200 एमएम आदि से गांवों को जोड़ती चली जाएगी, जिससे गांव में पानी आसानी से पहुंच सके।
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फेल हो जाती समूह पेयजल योजना
जलनिगम की ग्राम समूह पेयजल योजना शुरू होने के कुछ समय बाद फेल हो जाती है। अंतिम छोर से जोड़े गए गांव में कुछ साल बाद पानी पहुंचना बंद हो जाता है। विभागीय अधिकारी योजना को बनाते समय इसका ध्यान नहीं रखते हैं। नब्बे के दशक में तैयार हुई ग्राम पिपराबांस योजना शुरुआत में 76 गांव तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई थी, जो बाद में कम होते चले गए और वर्तमान में एक दर्जन से कम गांव को पानी पहुंच रहा है। यही हाल अन्य योजनाओं का है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी गांव के लोगों को पेयजल नसीब नहीं होता है, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं देते हैं।

गुणवत्ता का नहीं रखते ध्यान
करोड़ों रुपये से बनने वाली समूह पेयजल योजना के साथ एकल परियोजनाओं में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जाता है। यही कारण है कि परियोजना हैंडओवर होने में सालों लग जाते हैं। इस स्थिति में जल संस्थान इन परियोजनाओं को लेने से इंकार कर देता है।
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