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अतिक्रमण व कब्जा में गुम हो गया कुओं का वजूद

Sat, 29 Apr 2017 01:04 AM IST
lalitpur
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प्रशासन - फोटो : amar ujala
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जिन कुओं ने कई दशकों तक लोगों की प्यास बुझाई अब यह कुएं कहीं कचरे तो कहीं अतिक्रमण की चपेट में आ चुके हैं या फिर कब्जा कर लिए गए हैं। शासन द्वारा कुुआं, तालाब, पोखरों को बचाने के लिए तमाम योजनाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन नगर के कुओं का हाल देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह योजनाएं कितनी कारगर साबित हो रही हैं। नगर के कुओं की बदहाली के लिए अफसर व लोग बराबर जिम्मेदार हैं।
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शासन द्वारा कुओं को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। इसके बावजूद नगर के कुओं के वजूद पर खतरा मंडराने लगा है। गांधी नगर वार्ड नंबर दो में वर्षों पुराने कुआं के आसपास के अतिक्रमण कर लिया है। इसकी वजह से मंदिर जाने वाला रास्ता बंद हो गया है। आसपास के लोग भी उक्त कुएं में कचरा डाल रहे हैं। यही हाल आजादपुरा वार्ड प्रथम नगर के पास, तालाबपुरा, लक्ष्मीपुरा, घुसयाना, आजादपुरा द्वितीय, सिविल लाइन स्थित समेत अनेक कुओं का है। रिसाला मंदिर के पास स्थित कुइया की जगह तो पत्थर रखे हुए हैं। इसके साथ ही ललित टाकीज के सामने स्थित कुुएं का अस्तित्व तो दुकानों के अतिक्रमण में गुम हो गया है।


वार्ड नंबर 11 क्षेत्रांतर्गत मुहल्ला रावतयाना सहरिया बस्ती में बने वर्षों पुराने कुएं पर एक ही परिवार के लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। कुएं के चारों ओर निर्माण करके घेर लिया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार उक्त सार्वजनिक कुएं को उस दौर में देखा है, जब इस कुएं से सहरिया बस्ती के करीब 400 परिवार अपनी प्यास बुझाते थेे। धीरे-धीरे इस कुएं पर अतिक्रमण कर लिया और सार्वजनिक कुएं पर कब्जा कर बंद कर दिया गया। वहीं, ललितेश्वरी माता मंदिर मार्ग के पास बने  प्राचीन कुएं का कुछ माह पूर्व भराव कर कुएं का अस्तित्व ही खत्म कर दिया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कुआं काफी पुराना था और वर्षों से इस कुएं का सार्वजनिक तौर पर उपयोग किया जाता था। अब यहां पेयजल की समस्या भी गहराने लगी है और लोगों को पुराने इस कुएं की याद आने लगी है। वार्ड नंबर 24 में तालाब पुरा मार्ग पर प्राचीन छतदार कुआं पर अवैध तरीके अतिक्रमण कर लिया गया है। वहीं, तालाबपुरा में बीच छोटीदेवी मंदिर के पास बीच तिराहे पर बने प्राचीन कुआं पर भी अतिक्रमण कर लिया गया है। इस कुआं की चहारदीवारी के भीतर बजरी की टाल संचालित हो रही है और मुख्य गेट पर हमेशा ताला जड़ा रहता है।
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फोटो-8
कैप्सन-राजकुमार यादव।
मुहल्ले में एक ही सार्वजनिक कुआं था, जो कि काफी प्राचीन था। मुहल्ले के ही एक व्यक्ति ने धीरे-धीरे कुएं पर कब्जा कर लिया। मुहल्लेवासियों के साथ अनेक बार इस प्राचीन कुएं को कब्जा मुक्त कराने की मांग की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
- राजकुुमार यादव, नेहरू नगर।

मुहल्ला में बहुत वर्षों पहले कलारी बनने से पूर्व सार्वजनिक कुआं के पानी से लोगों की प्यास बुझती थी। अब इस कुएं पर कलारी खुल गई है। वर्षों पहले जब पानी के लिए कोई अन्य साधन नहीं होते थेे, तो उस दौरान पूरा मुहल्ला इसी कुएं का उपयोग किया करता था। यदि कुएं की सफाई कराकर इसको फिर से सार्वजनिक कर दिया जाए तो स्थानीय लोगों को काफी हद तक पेयजल की समस्या से राहत मिल सकती है।
-भजनलाल रैकवार।

कुआं पर ही चल रही कलारी
मुहल्ला नेहरू नगर में बी केबिन से स्कूल की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर पानी के लिए सबसे अधिक समस्या है। मुहल्ले में कुछ वर्षों पहले ग्राम सभा का प्राचीन कुआं था, लेकिन कुएं का भराव कराकर उस पर दुकान का निर्माण कर दिया गया है। वर्तमान में उक्त दुकान में देशी शराब का ठेका संचालित हो रहा है। स्थानीय निवासी राजकुमार यादव ने मुहल्लेवासियों के साथ मिलकर इस कुएं को जनहित में कब्जा मुक्त कराने के लिए प्रशासन से मांग की, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी कार्रवाई का कोई नतीजा सामने नहीं आया है।
-पार्षद, कमल सिंह।

ललितपुर। मुहल्ला नेहरू नगर में इस समय पेयजल की भारी समस्या चल रही है। टैंकरों से पानी की आपूर्ति करनी पड़ रही है। यदि सार्वजनिक कुआं पर कब्जा नहीं होता, तो आज काफी हद तक कुआं के पानी से पेयजल राहत पहुंचती। तहसील में राजस्व अधिकारियों द्वारा यदि मुहल्ले का 50 साला भूलेख प्रपत्र की जांच कराई जाए, तो कुएं का स्वरूप फिर से खोजा जा सकेगा।
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प्रकाश अहिरवार, स्थानीय नेहरूनगर निवासी।

कुओं की सफाई कराकर उनमें मोटर लगाई जाएगी। जहां अतिक्रमण की शिकायत हैं, उन कुओं को चिह्नित कर अभियान चलाया जाएगा।
- राकेश कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद।
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