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प्राचीन कुओं पर कहीं कब्जा, कहीं वजूद खत्म

Tue, 26 Apr 2016 12:44 AM IST
lalitpur
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कुआं - फोटो : amar ujala
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ललितपुर।  नगर के विभिन्न क्षेत्रों में बने प्राचीन सार्वजनिक कुओं पर दबंगों  द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है या फिर इन कुओं का अस्तित्व ही खत्म कर  दिया गया है। शासन ने कई बार सार्वजनिक व प्राचीन कुओं को कब्जा मुक्त  कराने के निर्देश दिए, लेकिन इनको दरकिनार कर दिया गया। सूखे के हालातों ने स्थानीय लोगों को इन कुओं की अहमियत का अहसास दिला दिया है।
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नगर सीमा के सभी वार्डों में आधा सैकड़ा से अधिक प्राचीन कुएं बने हैं। कुछ  कुएं व बावड़ी इतने पुराने हैं जो देश में अंग्रेजी हुकूमत की गवाही देते  हैं। वर्षों पहले यह कुएं ही पेयजल का मुख्य साधन हुआ करते थे, लेकिन जैसे-जैसे हैंडपंप, बोर व नलों का चलन बढ़ा, तो कुओं का उपयोग बंद होता  गया। कुओं की प्रति स्थानीय लोगों की उदासीनता का कुछ लोगों ने फायदा उठाया और मौका पाते ही सार्वजनिक कुओं पर अतिक्रमण कर लिया।

वार्ड  नंबर 11 क्षेत्रांतर्गत मुहल्ला रावतयाना सहरिया वस्ती में बने वर्षों पुराने कुएं पर एक ही परिवार के लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है।  कुएं के चारों ओर निर्माण करके कुएं को घेर लिया गया है। मुहल्ले में रहने वाले लोग बताते हैं कि उन्होंने इस सार्वजनिक कुएं को उस दौर में देखा है जब इस कुएं से सहरिया बस्ती के करीब चार सौ परिवार अपनी  प्यास बुझाते थेे। धीरे-धीरे इस कुएं पर अतिक्रमण कर लिया और  सार्वजनिक कुएं पर कब्जा कर बंद कर दिया गया। वर्तमान में इस सहरिया  बस्ती में मात्र एक ही हैंडपंप स्थानीय लोगों की प्यास बुझाने का सहारा बना  हुआ है। कुएं के पास ही एक सरकारी हैंडपंप भी हुआ करता था, जिसको हटाकर  वहां पर स्थाई दुकान का निर्माण कर लिया गया है।
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इसी कुएं से करीब  100 मीटर दूरी पर सड़क की दूसरी ओर ललितेश्वरी माता मंदिर मार्ग के पास बने  प्राचीन कुएं का करीब एक माह पूर्व भराव करके कुएं का अस्तित्व ही खत्म कर  दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार यह कुआं काफी पुराना था और वर्षों से  इस कुएं का सार्वजनिक तौर पर उपयोग किया जा रहा था। कुएं को खत्म करने से  स्थानीय लोगों को पानी की समस्या होने लगी है। कुछ लोगों का तो यह दावा है  कि उक्त कुआं सार्वजनिक था।  

शहर में स्थित कुओं पर हो गया अतिक्रमण
शहर  के बीचों-बीच पॉश इलाकों में बने प्राचीन कुओं पर भी अतिक्रमण कर लिया गया  है। वार्ड नंबर 24 में तालाबपुरा मार्ग पर काफी प्राचीन कुआं स्थित है,  जिसके छतदार कुएं से नाम से जाना जाता है। इस कुएं पर अवैध तरीके से  अतिक्रमण कर लिया गया है। इस कुएं से कुछ दूरी पर तालाबपुरा व तुवन मार्ग  तिराहे पर एक प्राचीन कुआं है, इस पर भी अतिक्रमण कर लिया गया है। नझाई  बाजार में टाकीज के सामने भी काफी पुराना कुआं है, इस कुएं के चारों ओर  स्थाई व अस्थाई दुकानों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। इसी तहर शहर के कई  इलाके हैं, जहां के प्राचीन व सार्वजनिक कुओं पर अवैध तरीके से अतिक्रमण  है। शासन व प्रशासन द्वारा अनेक बार सार्वजनिक व प्राचीन कुओं को कब्जा व  अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश नगर पालिका व जिला प्रशासन को दिए जा चुके  हैं, लेकिन आज तक सार्वजनिक कुओं को कब्जा मुक्त नहीं कराया गया है।

नेहरु नगर में संचालित हो रही कलारी
शहर  का नेहरु नगर क्षेत्र में पानी के लिए सबसे अधिक समस्या है। वार्ड नंबर 04  के पार्षद कमल यादव बताते हैं कि मुहल्ले में कुछ वर्षों पहले ग्राम सभा  का प्राचीन कुआं था, लेकिन कुएं का भराव कराकर उस पर दुकान का निर्माण कर  दिया गया है। वर्तमान में उक्त दुकान में देसी शराब का ठेका संचालित किया  जा रहा है। स्थानीय निवासी राजकुमार यादव ने मुहल्लेवासियों के साथ मिलकर  इस कुएं को जनहित में कब्जा मुक्त कराने के लिए प्रशासन से मांग की, लेकिन  वर्षों बीतने के बाद भी कार्रवाई का कोई नतीजा सामने नहीं आया है।

कुओं  की सफाई कराने के लिए टेंडर निकाला जाना है, वर्तमान में टेंडर प्रक्रिया  के लिए कागज तैयार किए जा रहे हैं। जिन कुओं पर अतिक्रमण है, उनको सफाई के  दौरान कब्जा मुक्त किया जाएगा।
- राकेश कुमार
अधिशासी अधिकारी नगर पालिका

मुहल्ला  रावतयाना में सहरिया वस्ती में काफी प्राचीन कुआं था, जिस पर स्थानीय  लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। वर्षों पहले जब पानी के लिए कोई  अन्य साधन नहीं होते थेे, तो उस दौरान पूरा मुहल्ला इसी कुएं का उपयोग किया  करता था। यदि कुएं की सफाई कराकर इसको फिर से सार्वजनिक कर दिया जाए तो  स्थानीय लोगों को काफी हद तक पेयजल की समस्या से राहत मिल सकती है।
- कमरुद्घीन
स्थानीय निवासी मुहल्ला रावतयान

मुहल्ले  में एक ही सार्वजनिक कुआं था, जो कि काफी प्राचीन था। मुहल्ले के ही एक  व्यक्ति ने धीरे-धीरे कुएं पर कब्जा कर लिया। मुहल्लेवासियों के साथ अनेक  बार इस प्राचीन कुएं को कब्जा मुक्त कराने की मांग की, लेकिन कोई फायदा  नहीं हुआ।
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- राजकुुमार यादव
नेहरु नगर निवासी
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