ललितपुर। नगर पालिका परिषद विभिन्न वार्डों से निकल रहे कचरे को अब कमाई का जरिया बनाएगी। इसके तहत गीले कचरे से कंपोस्ट खाद बनाई जा रही है वहीं, सूखे कचरे से कबाड़ छांटकर उसे बेचा जाएगा। इस कार्य के लिए तीन सेंटर बनाए गए हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने शहर में निकल रहे कचरे के निपटान के निर्देश दिए हैं। इसे ध्यान में रखकर मोहल्ला रामनगर में एमआरएफ (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर) स्थापित किया जा रहा है। इस सेंटर पर विभिन्न वार्डों से निकल रहे कचरे को छांटने का काम किया जाना है। सेंटर का काम अंतिम चरण में है। वहीं, तीन अस्थाई सेंटर बनाए गए हैं। यह मोहल्ला नेहरू नगर में हड्डी मील के पास, चंडीमाता मंदिर के पीछे श्मशान घाट के पास और सीतापाठ नर्सरी के पास बनाए गए हैं। प्रत्येक सेंटर पर रोजाना करीब तीन मीट्रिक टन कचरा आसपास के वार्डों का पहुंचता है। एक सेंटर पर चार कर्मियों को छटाई के कार्य में लगाया गया है, जो सेंटर पर सूखा व गीला कचरा अलग कर रहे हैं। सूखे कचरे में लोहा और अन्य धातु जो बाजार में बिकने योग्य है, उसे एक जगह सुरक्षित रखा जा रहा है। इसी तरह गीले कचरे में जानवरों के खाने के योग्य चारे को पृथक किया जा रहा है। इसके बाद अनुपयोगी गीले कचरे से कंपोस्ट खाद का निर्माण किया जा रहा है। कंपोस्ट खाद के लिए गड्ढे खोदे जा रहे हैं। इस प्रकार सूखे और गीले कचरे से कमाई की जाएगी।
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यह है व्यवस्था
वर्तमान में शहर में कचरा डोर टू डोर एकत्रित किया जाता है। इस तरह प्रतिदिन पचास मीट्रिक टन कचरा मोहल्ला रामनगर स्थित टंचिंग ग्राउंड में एकत्रित किया जाता है। इसमें डीजल, पेट्रोल खर्च होता है। इसके अलावा कई कर्मचारी भी लगे हुए हैं। वार्डों के नजदीक सेंटर बनाए जाने से डीजल, पेट्रोल की खपत कम होगी, साथ ही कर्मचारियों पर काम का दवाब भी घट जाएगा।
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शहर के विभिन्न भागों से निकल रहे कूड़े का निस्तारण वार्ड के नजदीक ही किए जाने की व्यवस्था की गई है। इससे परिवहन पर होना वाला व्यय कम हो जाएगा।
संदीप कुमार, सफाई एवं खाद्य निरीक्षक, नगर पालिका परिषद