नगर पालिका व शासन भले ही शहर में विकास का दावा करती है, लेकिन शहर के वार्ड नंबर 15 के मुहल्ला पिसनारी बाग निवासी पांच सौ से अधिक परिवार आज भी विकास की आस में हैं। यहां रहने वाले लोग भले ही नगर पालिका क्षेत्र की सीमा हद में हैं और वोटर भी है, लेकिन पक्की सड़क, नाली, बिजली, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाओं से आज भी वांछित हैं।
राजघाट मार्ग पर स्थित वार्ड नंबर 15 का मुहल्ला पिसनारी बाग काफी पुराना मुहल्ला है। बीते इस दशक में इस क्षेत्र का काफी तेजी से बसना शुरू हुआ। पिसनारी बाग तिराहे से नगर पालिका सीमा हद तक करीब पांच-छह सौ ग्रामीण परिवार अपने मकान बनाकर यहां आकर बस गए हैं। इनमें से करीब पांच सौ परिवार ऐसे हैं, जो नगर क्षेत्र के वोटर भी बन चुके हैं। उन्होंने पिछली नगर पालिका के चुनाव में वार्ड पार्षद व नगर पालिका अध्यक्ष को चुनने के लिए अपना मतदान किया था। राजनेताओं ने अपने हित के लिए इन परिवारों को नगरीय क्षेत्र की वोटर लिस्ट में तो शामिल करा दिया और वोट भी डलवा लिए, लेकिन नगर पालिका व विधानसभा का कार्यकाल बीतने वाला है पर अभी तक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाए हैं। यहां बस चुके नए इलाकों में करीब 70 प्रतिशत क्षेत्र में पक्की सड़कें नहीं है। लोगों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा लोगों के घरों से निकलने वाले पानी की निकासी के लिए भी पक्की नालियों को निर्माण नहीं किया गया है। पक्की नालियों के अभाव में घरों का पानी कच्ची सड़कों पर जमा होता रहता है, जिससे हमेशा ही कीचड़ जैसे हालात बने रहते हैं। बरसात के दौरान कई गलियों में लोगों का आवागमन पूरी तरह से बंद हो जाता है। स्थानीय लोगों ने अनेकों बार वार्ड पार्षद, नगर पालिका व जिला प्रशासन से पक्की सड़कें व नाली का निर्माण कराने की मांग की है, लेकिन हालातों में कोई सुधार नहीं किया गया है। शहर क्षेत्र में कई वर्ष बिताने के बाद भी अब तक शहरी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।
बिजली के नहीं पोल, बल्लियों का सहारा
राजघाट मुख्य मार्ग से करीब तीन-चार सौ मीटर अंदर तक बस्ती बस गई है। यहां बिजली के खंभों की भी व्यवस्था नहीं है। स्थानीय लोगों ने किसी तरह जुगाड़ बनाकर मुख्य मार्ग से सैकड़ों मीटर लंबे तार डालकर बिजली की व्यवस्था कर ली है। यह बिजली के तार लकड़ी की बल्लियों व बांस के सहारे टंगे हुए हैं, यह तार किसी खतरे से खाली भी नहीं है।
स्वच्छ पेयजल तक नसीब नहीं
मुहल्ला पिसनारी बाग के इस क्षेत्र में पानी की पाइप लाइन नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों को आज भी स्वच्छ पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है। शहरी क्षेत्रों में बने हर घर में स्वच्छ पेयजल पहुंचे इसके लिए भारत सरकार द्वारा संचालित अमृत योजना के तहत घर-घर में निशुल्क नलों का कनेक्शन किया जाना है। नलों के कनेक्शन का कार्य जल निगम द्वारा किया जाना है, जिसके लिए जिल निगम में करीब ढाई करोड़ रुपये की कार्य योजना बनाई है। जल निगम ने जो यह कार्ययोजना बनाई है वह नगर पालिका विभाग में दर्ज मकानों के आधार पर बनाई गई है और इसी रिकार्ड के आधार पर ही करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की लागत से नलों में मीटर लगाए जाने हैं। पिसनारी बाग में रहने वाले यह पांच सौ अधिक परिवार नगर पालिका सीमा हद में होने के बाद भी उनके मकानों को नगर पालिका में नहीं चढ़ाया गया है। नगर पालिका के रिकॉर्ड में मकान दर्ज नहीं होने के कारण यह अमृत योजना में भी वंचित रह जाएंगें।
सीमा विस्तार में जागी विकास की उम्मीद
शासन ने नगर पालिका क्षेत्र का सीमा विस्तार कर दिया है, अब पिसनारी बाग में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में रह रहे लोगों में यह उम्मीद जागी है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र का विकास जरूर होगा। इस संबंध में स्थानीय निवासी देवेंद्र राजपूत ने कहा कि बीते पांच-छह साल से मुहल्ले वासी विकास की बाट जोह रहे हैं।
केवल नाम के लिए हैं शहरी
यहां रहते हुए करीब पांच साल बीत गए हैं। लेकिन वह केवल नाम के लिए ही शहरी है, न तो पक्की सड़कें हैं और न ही पानी की निकासी के लिए नाली की कोई व्यवस्था है। पीने के पानी के लिए हैंडपंप ही एक मात्र सहारा है।
उमा देवी रिछारिया
स्थानीय महिला
गांव से बेकार माहौल
स्थानीय वृद्धा श्याम बाई करती हैं, वह छह साल पहले अपने गांव से यहां यह सोचकर आई थीं कि शहर में रहने से अच्छा सुविधाएं मिलेगी, लेकिन यहां का माहौल तो गांव से भी बेकार है। कम से कम गांवों में पक्की सड़कें तो हैं, यहां तो न ही सड़कें व नाली हैं और न पानी की व्यवस्था।
श्याम बाई
स्थानीय निवासी