संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर-बिरधा। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरएन सोनी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी भले ही खुद को तकनीक और करियर के मामले में सबसे आगे मानती हो, लेकिन सेहत के मोर्चे पर एक मूक संकट उन्हें अपनी चपेट में ले रहा है। वह रविवार को इलाईट स्थित एक होटल के सभागार में नीमा एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. सोनी ने कहा कि हाल ही में आए विभिन्न स्वास्थ्य सर्वेक्षणों और डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार 18 से 35 वर्ष के युवाओं में विटामिन डी-3 और विटामिन बी-12 की भारी कमी देखी जा रही है। कभी बढ़ती उम्र की बीमारी मानी जाने वाली यह कमी अब युवाओं को समय से पहले बूढ़ा और थका हुआ बना रही है। इस संकट के पीछे कोई आनुवंशिक कारण नहीं, बल्कि पूरी तरह से हमारी आधुनिक जीवनशैली जिम्मेदार है।
मुख्य वक्ता डीएनबी मेडिसिन डॉ. निखिल गुप्ता ने कहा कि आज के युवा दिन का अधिकांश समय एसी दफ्तरों, वर्क-फ्रॉम-होम या कमरों में लैपटॉप और स्क्रीन के सामने बिताते हैं। धूप में न निकलने के कारण शरीर चाहकर भी विटामिन डी-3 नहीं बना पाता। पैकेज्ड फूड, कैफीन और जंक फूड का चलन बढ़ा है। विटामिन बी-12 मुख्य रूप से डेयरी उत्पादों (दूध, पनीर) और मांसाहारी भोजन में पाया जाता है। खराब खान-पान और क्रैश डाइटिंग के चक्कर में शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पा रहा है।
नीमा के अध्यक्ष डॉ. एसपी पाठक युवा अक्सर शरीर में हो पनप रहे लक्षणों को नजरंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर रूप ले लेते हैं। विटामिन डी-3 व विटामिन बी-12 कमी के लक्षण हर वक्त हड्डियों और पीठ में दर्द रहना, सुबह उठते ही अत्यधिक थकान और कमजोरी मांसपेशियों में खिंचाव और असमय खून की कमी हो जाती है। उन्होंने ने कहा हर 10 में से 7 युवाओं के ब्लड टेस्ट में विटामिन डी-3 और बी-12 का स्तर सामान्य से काफी नीचे मिल रहा है।
डॉ. मनवीर सिंह तोमर ने कहा कि लोग बिना डॉक्टर की सलाह के मल्टीविटामिन की गोलियां खाने लगते हैं, जो सही नहीं है। युवाओं को अपनी जीवनशैली में सुधार करने की सख्त जरूरत है। इस मौके पर डॉ. विशाल जैन, डॉ. अमिताभ पाराशर, डॉ. सौरभ साहू, डॉ. प्रतीक जैन, डॉ. आलोक जैन, डॉ. उत्कर्ष चौबे, डॉ. शील चंद्र राजपूत, डॉ. शशांक पाठक, डॉ. विवेक सक्सेना आदि मौजूद रहे।