- राजघाट बांध परियोजना में मकान, पेड़, बंधी और कुआं का मुआवजा नहीं देने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। राजघाट बांध निर्माण में भूमि अधिग्रहण में किसानों की जमीन का घटी दर में मुआवजा दिया गया, लेकिन मकान,पेड़, बंधी और कुआं का अधिग्रहण का मुआवजा नहीं मिलने से नाराज ग्रामीण शुक्रवार को कलक्ट्रेट में धरने पर बैठ गए। उन्होंने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर नियमानुसार उचित मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।
ब्लॉक जखौरा के ग्राम रानीपुरा के ग्रामीणों ने डीएम को दिए ज्ञापन में बताया कि राजघाट बाघ संयुक्त परियोजना ललितपुर में वर्ष 1978 में राजघाट बांध के नाम से परियोजना चालू की गई थी। आरोप लगाया कि वर्ष 1981 में किसानों की घटी दर में मुआवजा दिया गया था, लेकिन अभी तक कई ग्रामों का मुआवजा वितरण नहीं किया। बताया कि ग्राम रानीपुरा का 13 एकड़ और ग्राम चौरसिल का 14 एकड़ जमीन का, मकानों का, पेडों का, बंधी का कुआं का व पुर्नवास भी नहीं दिया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बेतवा रिवर बोर्ड के अधिकारियों ने वन विभाग को गलत नीति के अनुसार वन विभाग को जमीन बदले में है, जो बिल्कुल नियम विरुद्ध है। जिलाधिकारी से कहा कि पूरा गांव मजदूर श्रमिक वर्ग का है और पलायन पर आश्रित है। उन लोगों के द्वारा गत वर्ष भी अधिकारियों को ज्ञापन दिए गए थे, जिसमें प्रशासन द्वारा कोई संतोषजनक समाधान नहीं किया गया। पिछले वर्ष 20 अगस्त को उपजिलाधिकारी सदर द्वारा टीम गठित की गई थी जो आंकलन करने नहीं गए। मात्र वन विभाग कर्मचारी मौके पर गए थे, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने बीते तीन फरवरी को भी जिलाधिकारी को मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर ज्ञापन दिया था और चेतावनी दी थी कि यदि 18 फरवरी तक निस्तारण नहीं किया जाता है तो वे 20 फरवरी से भूख हड़ताल पर बैठेंगे। अब भी उनकी समस्या का निस्तारण नहीं होने से आक्रोशित ग्रामीण शुक्रवार को कलक्ट्रेट परिसर में पहुंचकर धरने पर बैठ गए। जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने ग्रामीणों की समस्या सुनकर इसकी जांच अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे राजेश श्रीवास्तव को सौंप दी। इसके बाद भी ग्रामीण नहीं माने और लिखित आश्वासन देने पर ही धरने से उठने की बात कर रहे थे। ज्ञापन पर रावराजा सिंह, राघवेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह, जगभान सिंह, वृंदावन यादव, भैयालाल, सुखलाल, रतीराम आदि के हस्ताक्षर हैं।