संवाद न्यूज एजेंसी
तालबेहट (ललितपुर)। वर्ष 1992 में राम जन्म भूमि आंदोलन का प्रमुख केंद्र तालबेहट रहा था। रामकाज के लिए निकले तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी, विष्णुहरि डालमिया, अशोक सिंघल, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और विनय कटियार को गिरफ्तार कर यहां माताटीला विश्राम गृह में बंद किया गया था।
भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के यहां होने के चलते करीब एक माह तक माताटीला छावनी में तब्दील रहा। इन नेताओं से मिलने के लिए कई प्रांतों के मुख्यमंत्री व उद्योगपति समेत दिग्गज नेताओं का जमावड़ा लगा रहा। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान 10 जनवरी को जमानत पर इन नेताओं को रिहा कर दिया था। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की रिहाई होते ही प्रमुख सड़कें समेत गलियां भगवा मय हो गई थीं। रामलीला मैदान में स्वागत किया गया था तो नगर में पुष्प वर्षा की गई थी। राम मंदिर को लेकर लोगों की आस्था देखते ही बन रही थी। राम मंदिर निर्माण को लेकर लोगों में उस समय भी काफी उत्साह था।
एक माह तक रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
भाजपा व विहिप के शीर्ष के नेताओं के जेल में बंद होने के बाद विश्राम गृह ही नहीं, इसके लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर पुलिस व खुफिया विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने डेरा डाले रखा। हालात यह थे कि आसपास के लोगों को भी कई जगह पर तलाशी देनी होती थी।
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-मिलने के लिए करनी पड़ती थी मशक्कत
विश्राम गृह में बंद भाजपा व विहिप के राष्ट्रीय स्तर के नेताओं से मिलने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। प्रक्रिया इतनी जटिल थी कि शीर्ष स्तर के नेताओं तक को परेशान होना पड़ता था। मिलने की अनुमति पर कई घेरों की जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।
ये नेता आए थे मिलने
दिल्ली के मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी, विजयाराजे सिंधिया, क्रिकेटर चेतन चौहान और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा समेत कई सांसद और उद्योगपति यहां आए थे।