ललितपुर। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह में भी नियमों को धता बता कर सड़कों पर अनफिट बसों को दौड़ाया जा रहा है। इनमें कई बसों की सीट फटी हुई हैं तो कुछ बसें आवाज कर रही हैं। इसके बाद भी क्षमता से अधिक सवारियों को ढो कर जान जोखिम में डालकर यात्रा करा रहे हैं। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी मौन हैं।
जनपद में अब तक यातायात व्यवस्थाएं सुदृढ़ नहीं हो पाई है। यहां पर अब तक भी कई मार्गों पर बसों का अभाव बना हुआ है, तो कई मार्गों में एक या दो बसों का ही संचालन हो रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्र में चलने वाली बसों की फिटनेस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
परिवहन विभाग द्वारा यातायात की सुविधा के लिए डेढ़ सौ बसों के संचालन को परमिट जारी किए गए हैं। इनमें कई बसें मध्य प्रदेश के टीकमगढ़, दतिया, अशोक नगर, सागर सहित कई अन्य जिलों के लिए चल रहीं है। इसके अलावा जनपद के ब्लाक मुख्यालय व दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रही हैं। इन बसों में सवारियों का आवागमन भी अधिक होता है। ग्रामीण क्षेत्र से मुख्यालय तक के लिए प्रतिदिन सवारियों का भी आवागमन अधिक होता है।
लेकिन बसों की कमी के चलते मजबूरन ही खटारा बसो में सफर करना पड़ रहा है। कई बसों की सीट फटी पड़ी है। कई तो धुआं छोड़ रहीं है, इससे वायु प्रदूषण फैला रहीं है। इतना ही नहीं, कई बसें आवाज कर रही हैं। कुछ बसें तो ऐसी हैं जिनकी खिड़कियों में कांच नही हैं। बच्चों को किनारे बिठाने का भय बना रहता है। बारिश व सर्दी के मौसम में भी परेशानी होती है। ऐसे में जिन गांव में एक बस का ही संचालन हो रहा है। वहां पर सवारियों को ठूंसकर यात्रा करना पड़ती है। इस पर विभागीय अधिकारी अब तक अंकुश लगाने में नाकाम रहे हैं। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लग रहे हैं।
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जिले में संचालित कुछ बसें अनफिट की स्थिति में चलने की जानकारी हुई है। जिसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
सुरेंद्र कुमार अग्रवाल, यात्री कर अधिकारी
सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय