ललितपुर। देश में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने के बाद से ही समर्थन व विरोध में प्रदर्शनों का आयोजन हो रहा है। राजनीतिक दल इसकी अपने-अपने तरीके से इसकी व्याख्या कर रहे हैं। इससे आम जन मानस भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही है। आज शहरवासियों की राय जानना का प्रयास किया तो लोगों की मिश्रित राय निकलकर आई। किसी ने 1947 में हुई भूल का सुधार बताया तो किसी ने इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया। इसके लिए शनिवार को जिले में भाजपा की ओर से कानून की सही जानकारी देने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती के नेतृत्व में शांति मार्च निकाला जाएगा। और लोगों तक नागरिकता संशोधन कानून के संबंध में जानकारी दी जाएगी।
देश में नागरिकता संशोधन कानून 2019 के तहत पाकिस्तान,अफगानिस्तान व बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए हिंदू,सिक्ख,ईसाई,पारसी,जैन और बुद्व धर्मावलंबियों को भारत की नागरिकता दिये जाने का प्रावधान है। नए विद्येयक के अंतर्गत यह प्रावधान है की पडोसी देशो के अल्संख्यक यदि 5 साल से भारत में रह रहे है तो वे अब भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते है। पहले भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिए 11 साल भारत में रहना अनिवार्य था।जो प्रवासी 31 दिसंबर 2014 से भारत में अवैध रूप से रह रहे है अब भारतीय नागरिकता हेतु आवेदन कर सकेंगे। इस अधिनियम की विशेष बात यह है कि इस अधिनियम में मुसलमान शरणार्थियों को नागरिकता नहीं प्रदान की जा सकेगी, इसके पीछे यह कारण दिया गया है कि उक्त देश इस्लामी देश हैं और मुस्लिम बाहुल हैं। जनपद में किसी तरह का माहौल ना बिगड़े इसलिए कानून की सही जानकारी सबको होनी जरूरी है।
नागरिकता संशोधन कानून संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को कमजोर बनाता है। यह देश के लोगों में भेदभाव की भावना उत्पन्न करता है। यह कानून भारत की विविधता में एकता वाली राजनीति और संस्कृति पर हमला है। इस कानून ने लोगों के अंदर सरकार की मंशा को जाहिर कर दिया है। नागरिकता संशोधन कानून पर हो रहा देशव्यापी विरोध इसी मंशा के प्रति लोगों की असहमति का प्रदर्शन है।
- रोहित गुप्ता
इस कानून से किसी की नागरिकता छीनी नहीं जायेगी। बल्कि यह कानून नागकिता देने के लिए बनाया गया है। निश्चित रूप से नागरिकता संशोधन कानून मानवता के द्रष्टिकोण से सराहनीय कदम है। शरणाथिर्यों को नागरिकता दिया जाना उचित है। सभी को कानून की सही जानकारी होनी जरूरी है। जिससे शांति बनी रहेगी।
- गजेंद्र सिंह,प्रधानाचार्य
नागरिकता संशोधन कानून जल्दबाजी में लिया गया फैसला है। यह समता एवं समानता के अधिकार का हनन है। देश में शांति और सौहार्द बनाये रखने के लिए सरकार को नागरिकता संशोधन कानून पर एक बार पुन: विचार करना आवश्यक है।
- सतीष नयन
नागरिकता संशोधन कानून राष्ट्रहित में लिया गया अच्छा फैसला है। लेकिन इसमें सभी वर्गों को समान अधिकार देना आवश्यक है। जिससे देश में सौहार्द माहौल बना रहे।
- कामता प्रसाद,
1947 में देश के बटवारे के समय नेहरू और गांधीजी की भूल को सुधरने के लिए नागरिकता संशोधन कानून लाया गया है। जिसका सभी को स्वागत और सम्मान करना चाहिए। इस कानून से किसी की नागरिकता छीनी नहीं जायेगी। बल्कि यह कानून नागकिता देने के लिए बनाया गया है। इस पर विपक्ष हिंसा भड़का रहा है जोकि देश हित में नहीं है।
-रमेश साहू,एडवोकेट
नागरिकता संशोधन कानून देश के हित में है। इस कानून को लेकर शहर के किसी भी वर्ग के किसी भी व्यापारी को कोई रोष नहीं है। बल्कि व्यापारी वर्ग इसका स्वागत कर रहे हैं।
- नरेंद्र कड़ंकी,नगर अध्यक्ष व्यापार मंडल
--------------------------------------