ललितपुर। जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी हो रही है। ओपीडी समय के बाद कक्ष खुलने से चंद महिलाएं ही अल्ट्रासाउंड का लाभ ले पा रही हैं। बाकी, अधिक पैसे खर्च करके बाहर से कराने को मजबूर है। डीएम के निर्देश पर स्वागत पटल शुरू किया गया, लेकिन मरीजों को संतुष्ट नहीं किया जा रहा है।
जिला महिला अस्पताल प्रमुख अस्पतालों में से एक है। यहां शहर व ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं उपचार के लिए आतीं है। इससे अस्पताल में ओपीडी समय में भीड़ रहती है। 24 घंटे में करीब तीस महिलाओं के प्रसव किए जाते हैं। लेकिन अस्पताल प्रबंधन की अनेदखी के कारण मरीजों को उपचार की सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं। 26 नवंबर से अस्पताल में कार्यरत अल्ट्रासाउंड करने वाले चिकित्सक डा. गजेंद्र सिंह अवकाश पर हैं। इससे यहां पर अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं, जबकि इसकी जानकारी पटल पर नहीं दी गई है। इससे कई महिलाएं चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार अल्ट्रासाउंड कराने के लिए ओपीडी कक्ष के बाहर बैठी रहती हैं। समय बीतने के बाद अल्ट्रासाउंड न होने पर मायूस होकर लौट जाती है। कई महिलाएं पैसे खर्च कर बाजार से करा रही हैं। कुछ निर्धन महिलाएं समय पर आने के बाद भी अल्ट्रासाउंड नहीं करा पा रही हैं।
ओपीडी समय समाप्त होने के बाद अल्ट्रासाउंड कक्ष खोला जा रहा है, जिसमें चंद महिलाओं के ही अल्ट्रासाउंड हो पा रहे हैं। जानकारी के अभाव में कुछ महिलाएं परिसर में बैठी रहती हैं। बाहर से मुख्य द्वार का ताला लगा दिया जाता है, जिससे अंदर अल्ट्रासाउंड होने की जानकारी नहीं हो पाती है। पटल पर भी इसकी जानकारी नहीं दी जा रही है।
शोपीस बना जानकारी पटल
अस्पताल में मरीजों को जानकारी देने के लिए स्वागत पटल बनाया गया है। लेकिन, पटल मरीजों के लिए सहायक साबित नहीं हो पा रही है। इसकी हकीकत तब सामने आई, जब कुछ मरीज अल्ट्रासाउंड होने की जानकारी लेने के लिए शनिवार को दोपहर में करीब डेढ़ बजे पहुंचे, तो पटल कर्मी जानकारी नहीं दे सके।
एक घंटे ही हो पाते अल्ट्रासाउंड
जिला महिला अस्पताल गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड करने के लिए समय का अभाव है। इसलिए दो बजे के बाद ही अल्ट्रासाउंड शुरू किए जाते हैं। जो केवल एक घंटे तक ही किए जाते हैं। तीन बजे अल्ट्रासाउंड कक्ष को बंद कर दिया जाता है।
- डा. अनुराग यादव
अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक के अवकाश पर जाने से गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रसाउंड के लिए परेेशान होना पड़ रहा है। जिसके लिए जिला अस्पताल से कुछ समय के लिए चिकित्सक को लगाया गया है।
- डा. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी