ललितपुर। मध्याह्न भोजन योजना का करोड़ों रुपये पूर्व प्रधानों से वसूल नहीं हो पा रहा है। पिछले दिनों पंचायत चुनाव में वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी, जो 25 लाख रुपये की वसूली पर ठहर गई।
जिले के 1,560 राजकीय, सहायता प्राप्त और परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को दोपहर में गर्म पका पकाया भोजन मुहैया कराया जाता है। वर्ष 2005 से 2010 तक के कार्यकाल में गांव के जनप्रतिनिधि योजना का लगभग दो करोड़ रुपये डकार गए थे। डीएम डा. रूपेश कुमार ने पंचायत चुनाव के मद्देनजर वसूली प्रक्रिया शुरू की।
इस दौरान बकाएदार पूर्व प्रधानों के चुनाव लड़ने में बाधा उत्पन्न हुई। इसका नतीजा यह हुआ कि करीब दो करोड़ के सापेक्ष करीब 25 लाख रुपये की वसूली हो गई। जिन पूर्व प्रधानों ने चुनाव नहीं लड़ा, उन पर आज तक विभागीय शिकंजा नहीं कसा जा सका है। जिससे वसूली 25 लाख रुपये से आगे नहीं बढ़ सकी है।
वर्तमान में पूर्व प्रधानों पर योजना का करोड़ों रुपये बकाया बना हुआ है। यदि विभागीय अफसर वसूली की कार्रवाई में ज्यादा दिलचस्पी दिखाएं तो और भी पूर्व प्रधान कार्रवाई के लपेटे में आ जाएंगे। विडंबना यह है कि वर्ष 2010 से 2015 तक का विभाग ने मिड-डे मील का लेखाजोखा तैयार कर लिया। लेकिन, उनकी वसूली नहीं निकाली।
इन हालात में वर्ष 2010 से 2015 तक के पूर्व प्रधानों को क्लीन चिट मिल गई है, जबकि अनेक पूर्व प्रधान वसूली के दायरे में आ रहे हैं।
क्या वसूली की होगी समीक्षा?
मंडलायुक्त के राममोहन राव का शनिवार से ललितपुर में भ्रमण कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस दौरान वह मिड-डे मील की वसूली की समीक्षा करते है या नहीं। यह देखना दिलचस्प होगा। वर्तमान मंडलायुक्त बीते वर्षों में मिड-डे मील के निदेशक रह चुके हैं। इस कारण वह योजना के कामकाज से भलीभांति परिचित हैं।