सिलावन। खुद भूखे पेट रहकर दूसरों का पेट भरने वाला अन्नदाता तरह- तरह से ठगी का शिकार हो रहा है। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन में अनाज व्यापारी किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। क्षेत्र में तो किसान तौल और मोल दोनों में ही ठगी का शिकार हो रहा है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि यहां व्यापारी जगह-जगह फड़ लगाकर फुटकर खरीद की आड़ में थोक खरीद कर रहे हैं। इस कारण किसान गल्ला मंडी तक पहुंच पा रहा है।
किसान को एक तो अपनी उपज का प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य नहीं मिल पा रहा है, दूसरा व्यापारी जहां मनमाने भाव पर उसकी खरीद कर रहे हैं, वही तौल में भी किसान से अधिक अनाज ले रहे हैं। अनाज व्यापारी लॉकडाउन में किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। आलम यह है कि किसानों को गेहूं की कीमत 1925 रुपये प्रति क्विंटल मिलना चाहिए थी, उसे मजबूरी में 1650 रुपये प्रति क्विंटल के दामों पर बेचना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ किसान ठगी का शिकार हो रहा है, बल्कि प्रतिदिन लाखों रुपये केे मंडी शुल्क की चपत भी लग रही है।
खास बात यह है कि मंडी समिति से जुड़े अधिकारी यह सब जानते हुए भी मूकदर्शक बने हुए हैं। किसान दबी जुबान यह कह रहे हैं कि बिना अधिकारी और व्यापारी की सांठगांठ के यह संभव नहीं है।
सरकार लॉकडाउन के चलते किसानों को तरह- तरह की राहत देने और आमदनी को दुगनी करने के लिए माथापच्ची कर रही हो, लेकिन सरकार की इस सोच की अवैध रूप से अनाज खरीदने वाले हवा निकाल रहे हैं। किसान को अपनी उपज की जो कीमत मिलनी चाहिए, वह भी नहीं मिल पा रही है। क्षेत्र के व्यापारी फुटकर अनाज खरीद की आड़ में जगह- जगह फड़ लगाकर थोक में खरीद कर रहे हैं। व्यापारी किसान को मंडी तक पहुंचने ही नहीं दे रहे हैं। किसान को बीच में ही रोक लेते हैं और उपज को औने- पौने भावों में खरीद लेते हैं। इतना ही नहीं मोल के साथ-साथ किसान को तौल में भी मारा जा रहा हैं।
एक गांव के किसान ने बताया कि उसने एक फुटकर व्यापारी को अपनी उपज बेची। व्यापारी ने उसकी उपज का तौल 61 किलो किया। उसी 61 किलो के कट्टे को अन्य कांटे पर तौला गया तो वजन से दो किलो अधिक निकला। जबकि किसान को सिर्फ 60 किलोग्राम का ही भुगतान किया गया। यह किसान तो बानगी मात्र है। क्षेत्र के हजारों किसान इस तरह से ठगी का शिकार हो रहे हैं। एक किसान की मानें तो यह फुटकर व्यापारी इलेक्ट्रानिक कांटों में कलाकारी करके मंडी भाव से भी ऊंचे दामों पर अनाज की खरीद कर लेते हैं।
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एक साल को मिलता है फुटकर लाइसेंस
फुटकर अनाज खरीद के लिए मंडी समिति व्यापारियों को एक वर्ष का लाइसेंस देती है, इसके तहत व्यापारी एक दिन में 30 क्विंटल अनाज की खरीद कर सकता है। इसके पीछे मंडी समिति का उद्देश्य यह रहता है कि लाइसेंसी व्यापारी अनाज की फुटकर खरीद करके उसे कृषि उत्पादन मंडी समिति में बेचे, लेकिन ऐसा नहीं होता हैं। फुटकर लाइसेंस की आड़ में अनाज कारोबारी थोक में अनाज खरीद रहे हैं। यह कारोबारी महरौनी मंडी में अनाज नहीं बेचते, बल्कि मध्यप्रदेश या अन्य जनपदों की मंडी में ले जाकर बेच देते हैं। ऐसा करके वह बिना गेट पास बनवाए मंडी शुल्क बचा लेते हैं। ऐसा करके मंडी के राजस्व को लाखों की चपत लगाई जा रही है।
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इलेक्ट्रानिक वजन तौलने वाली मशीन मेें की जाती है कारस्तानी
वर्तमान समय में ज्यादातर व्यापारी अनाज इत्यादि तोलने में इलेक्ट्रानिक वजन तौलने वाली मशीन का उपयोग कर रहे हैं। इसे व्यापारी कंप्यूटर कांटे के नाम से जानते हैं। ग्राहकों किसानों को कंप्यूटर कांटे में किसी प्रकार से गड़बड़ी नहीं होने की बात कहकर खूब गड़बड़ी कर रहे हैं। जानकारों की मानें तो इन्हीं इलेक्ट्रानिक बेडिंग मशीन में व्यापारी कारस्तानी कर घटतौली को अंजाम दे रहे हैं। इससे किसान घटतौली का शिकार हो रहे हैं।
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बाट एवं माप विभाग पर उठ रहे सवाल
किसानों के साथ हो रही घटतौली से बाट एवं माप विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। विभाग एक तो गाहे- बगाहे ही घटतौली रोकने के लिए अभियान चलाता है, दूसरा इलेक्ट्रानिक बेडिंग मशीन की प्रमाणिकता के नाम पर महज खानापूर्ति की जाती है। विभाग प्रतिवर्ष शिविर लगाकर कांटे, बाट एवं माप की जांच कर मुहर लगाकर प्रमाण पत्र जारी करता है। यदि बात इलेक्ट्रानिक बेडिंग मशीन की करें तो विभाग व्यापारी से मशीन की सिर्फ प्लेट मंगाकर उसमें मोहर लगा देता है, जबकि मशीन की कोई जांच नहीं होती है ऐसी स्थिति में व्यापारी घटतौली करने में सफल हो जाता है।
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किसानों के साथ ठगी करने वाले व्यापारियों के ख्रिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जल्द ही अभियान चलाकर तौल कांटों की जांच कराई जाएगी। जगह-जगह फड़ लगाना गलत है। व्यापारी को निर्धारित स्थान के लिए लाइसेंस दिया जाता है। जो व्यापारी ऐसा करते पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए जल्द अभियान चलाया जाएगा।
- जीके तिवारी
मंडी सचिव, महरौनी
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फोटो- 01
कैप्सन:-करन सिंह
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सरकार खरीद केंद्र के माध्यम से समर्थन मूल्य पर गेहूं तो खरीद रही है, किन्तु अनपढ़ किसान केंद्र पर गेहूं बेचने के नियमों के झंझट से बचने के लिए फुटकर व्यापारियों के पास पहुंच जा रहे हैं। औने पौने भावों में अपनी उपज को बेच रहे हैं, जिसका व्यापारी फायदा उठाते हैं।
- करन सिंह
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फोटो- 02
कैप्सन-वीरन
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फुटकर व्यापारी किसानों के साथ ठगी करके प्रतिदिन कई क्विंटल गेहूं खरीदकर उपज को इधर से उधर कर रहे हैं। यह व्यापारी मोल के साथ तौल में भी खेल कर रहे हैं। अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं।
- वीरन
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