ललितपुर। जिले में टूरिस्ट बसों के अवैध संचालन का कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। विभागीय उदासीनता के चलते लगातार बसों की संख्या बढ़ती जा रही है। मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक धड़ल्ले से नियमित दौड़ाई जा रही हैं। जहां इनमें क्षमता से अधिक सवारियों को बिठाया जा रहा है तो वहीं विभाग के राजस्व को भी चपत लग रही हैं।
टूरिस्ट बसों को परिवहन विभाग द्वारा परमिट जारी किया जाता है। जिसमें आने-जाने का समय निश्चित किया जाता है। साथ ही सवारियों की संख्या भी निश्चित रहती है। सवारियों का पूरा विवरण दिया जाता है। तय रूट पर जाने के बाद बस के आने पर परमिट स्वत: ही निरस्त हो जाता है।
लेकिन जिले में टूरिस्ट बसों का संचालन बिना रोक-टोक के धड़ल्ले से हो रहा है। वहीं महानगरों से सवारियां नहीं मिलने पर इनमें माल वाहक हो रही है। इनमें प्रदेशों में माल पहुुंचाया जा रहा है। कई बार तो अधिक सवारियों केे बिठाने पर बच्चों व अन्य लोगों की हालत खराब हो जाती है। जिला मुख्यालय पर अधिकारियों के सामने ही खुले आम टूरिस्ट बसों को नियमित चलाया जा रहा है। मुख्यालय पर स्थित बुकिंग कार्यालयों पर नियमित सेवाएं देने के बोर्ड लगे हैं। बोर्ड ही नहीं बसों का संचालन भी नियमित हो रहा है। कई टूरिस्ट बसों का संचालन को बस स्टैंड से ही किया जा रहा है।
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औपचारिकता निभा रहा सचल दल
परिहवन नियमों का पालन कराने के लिए शासन द्वारा सचल दल नियुक्त किया है, जो सड़कों पर संचालित वाहनों की जांच करता है। नियम विरूद्घ पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन यहां पर लगातार नियमों का उल्लंघन होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि सचल दल औपचारिकता निभा रहा है।
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बस स्टैंड से टूरिस्ट बसों के चलने की जानकारी हुई है। जिसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। टूरिस्ट बसों को बस स्टैंड से संचालित नहीं होने दिया जाएगा।
सुरेंद्र कुमार अग्रवाल, यात्रीकर अधिकारी