ललितपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट बाबर आजम ने दस वर्ष पूर्व एससीएसटी एक्ट के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई और तीन-तीन हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
सहायक शासकीय अधिवक्ता संजीव लिटौरिया ने बताया कि 17 अक्तूबर 2012 को थाना नाराहट अंतर्गत ग्राम रीछपुुरा निवासी परशु पुत्र कम्मोद अहिरवार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि गांव के धीरज, इंदर, प्रताप सिंह पुत्रगण भजन व उदय सिंह पुत्र धीरज उसके गड्ढे में पंप सेट रखकर पानी निकाल रहे थे। जब उसके भाई गोविंद ने पानी निकालने से मना किया तो आरोपियों लात घूसों और लाठी-डंडों से मारपीट कर दी थी। बीच बचाव करने आई भाभी गेंदा के साथ भी मारपीट की थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मारपीट, गाली गलौज, जान से मारने की धमकी देने सहित एससीएसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया था और जांच करके आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिए थे। विवेचना के दौरान एक आरोपी इंदर पुत्र भजन की मौत हो गई थी और धीरज, प्रताप और उदय सिंह के विरुद्ध न्यायालय में मामला विचाराधीन चल रहा था। शुक्रवार को मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट बाबर आजम के समक्ष की गई। सहायक शासकीय अधिवक्ता ने आरोपियों के विरुद्घ तमाम गवाह व सुबूत पेश किए। गवाह को सुनने और सुबूत देखने के बाद न्यायाधीश ने तीनों आरोपियों धीरज, प्रताप और उदय को दोषी करार दिया। सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने अभियुक्तों को धारा 323 और 504 में एक-एक वर्ष, धारा 506 में 2-2 वर्ष और एससीएसटी एक्ट में 3-3 वर्ष की सजा सुनाई। इसके साथ तीनों अभियुक्तों को 3-3 हजार रुपये का अर्थदंड लगया। पुलिस ने तीनों अभियुक्तों को न्यायिक अभिरक्षा से हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।