बसों से जाते अमझरा घाटी में फंसे मजदूर
- फोटो : LALITPUR
डोंगराखुर्द। एक मई को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जा रहा है। लेकिन, कोरोना वायरस के कारण मजदूरों की स्थिति बहुत खराब हो गई है। शुक्रवार को अमझरा घाटी बार्डर पर फंसे मजदूरों को तीन बसों के माध्यम से उनके घरों को भेजा गया।
मजदूरों को सैकड़ों किलोमीटर पैदल सफर करके, भूखे पेट, नंगे पैर, राज्यों की सीमाओं पर कड़े पहरे, वनवासी जीवन जैसे हालातों से गुजरना पड़ रहा है। मजदूरों ने कभी सोचा नहीं होगा कि उनके लिए ऐसा भी दिन आएगा। यदि गांवों में मजदूरों को रोजगार मिल जाए तो उन्हें शहरों की ओर क्यों भागना पड़े। जनपद की उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश सीमा अमझरा घाटी पर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम गौना के पास बड़ी संख्या में बाहर से मजदूर आए थे, लेकिन बार्डर पर फंस गए । उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी थे। उन्हें कभी खाना मिल गया तो कभी भूखे पेट भी सोना पड़ा था। रात्रि में खुले आसमान की नीचे सोने को मजबूर होना पड़ा था। इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से लगातार प्रकाशित किया। जिसे संज्ञान में लेकर अधिकारियों ने स्पेशल बसों द्वारा मजदूरों को उनके गृह जनपद भिजवाजा गया।
शुक्रवार को अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार मिश्रा, अपर पुलिस अधीक्षक अवधेश कुमार विजेता, तहसीलदार अभिषेक कुमार, पुलिस क्षेत्राधिकारी फूलचंद, थाना प्रभारी आनंद पांडेय नाराहट, गजेंद्र सिंह, उदयवीर सिंह, अभय सिंह कानूनगो ने रोडवेज की तीन बसों के माध्यम से मजदूरों को गृह जनपद भिजवा दिया है।