संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर-मड़ावरा। बीमारी से पिता की मौत के चंद घंटों बाद पुत्र द्वारा आत्महत्या करने के बाद अब परिवार के लोग सदमे में हैं। मृतक युवक के पुत्र-पुत्री सहित पत्नी की हालत सबसे ज्यादा खराब है। वे सिर्फ रो रहे हैं। पत्नी तो बेसुध पड़ी है।
थाना मड़ावरा अंतर्गत ग्राम बुदनी निवासी कल्यान पटेल लंबे समय से बिस्तर पर पड़ा था। 14 फरवरी की शाम को उसकी मौत हो गई थी। कल्यान का अंतिम संस्कार 15 फरवरी की सुबह किया जाना था। घर व गांव के लोग अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे कि इसी दौरान कल्यान के बड़े पुत्र मुकेश पटेल ने फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी। चंद घंटों के अंदर पिता-पुत्र की मौत से परिवार सहित गांव में सन्नाटा छा गया। मुकेश के दोनों बच्चों 13 वर्षीय पुत्र आयुष और 10 वर्षीय पुत्री प्रिंसी सहित पत्नी सोनम की हालत खराब है। आयुष व प्रिंसी अपने पिता के बारे में पूछते हैं और एक कमरे में जाकर रोते हैं। दोनों बच्चों को इस प्रकार रोता बिलखता देख घर के अन्य लोग व नाते रिश्तेदार सांत्वना दे रहे हैं। वहीं, सोनम पति को याद कर रोती है और अचेत हो जाती है। हालत यह हो गई है कि वह न तो कुछ खा रही है और न पी रही है।
भाई ने कल्यान को तो पुत्र ने मुकेश के शव को दी मुखाग्नि
कल्यान की मौत के बाद उसके शव का अंतिम संस्कार मृतक के भाई शोभाराम ने गांव में किया, जबकि पोस्टमार्टम होने के बाद 15 फरवरी की शाम को जब मुकेश का घर पहुंचा तो पूरा गांव रो पड़ा। मुकेश के शव की अंतिम क्रिया उसके पुत्र आयुष ने मुखाग्नि देकर की।
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दोनों भाई-बहन मां को दे रहे सांत्वना
मुकेश के आत्महत्या करने के बाद उसकी पत्नी सोनम की तो जैसे दुनिया ही उजड़ गई है। सोनम की यह हालत देख उसका पुत्र आयुष व पुत्री प्रिंसी अपनी मां के पास बैठ जाते हैं और सांत्वना देने लगते हैं। दोनों मासूम भाई-बहन स्वयं के आंसू नहीं रोक पाते और एकांत में जाकर खुद भी रोने लगते हैं। परिवार की यह हालत देख गांव के लोगों की आंखों से भी आंसू निकल आते हैं।
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पिता की बीमारी में लिया था कर्जा
कल्यान पटेल के दो पुत्र मुकेश व आशीष थे। छोटा पुत्र आशीष अविवाहित है और मुंबई में रहकर मजदूरी करता है। तीज त्योहार पर ही वह घर आता था। इस कारण मुकेश अपने पिता की देखभाल करता था, लेकिन करीब दो वर्ष पूर्व कल्यान को लकवा मार गया। उसके शरीर का एक हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। पिता को ठीक कराने के लिए मुकेश ने जो कुछ भी जमा पूंजी थी, वह खर्च कर दी। इसके साथ यहां वहां से कर्ज लेकर इलाज करवा रहा था, लेकिन कोई आराम नहीं मिल रहा था। मुकेश के इस संघर्ष पर कल्यान ने कई बार उसे टोका था, लेकिन मुकेश सिर्फ एक ही बात कहता था कि उसके पिता को कुछ हो गया तो वह भी जिंदा नहीं रहेगा।