ग्रामीणों ने राष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। राजघाट बांध परियोजना में ग्राम रानीपुरा और ग्राम चौरसिल में जमीन का मुआवजा न मिलने के मामले में ग्रामीणों ने राष्ट्रपति और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन भेजकर उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
राजघाट बांध के डूब क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रानीपुरा राजघाट के ग्रामीणों एवं कर्मचारियों ने प्रार्थना पत्र में बताया कि राजघाट बांध संयुक्त परियोजना मध्य प्रदेश जिला अशोकनगर एवं जिला ललितपुर में 1978 में चालू हुई थी। आरोप लगाया कि 1981 में किसानों को घटी दर पर मुआवजा दिया गया था। कई गांवों का मुआवजा वितरण नहीं किया गया। इसी तरह, ग्राम रानीपुरा का 13 एकड़ और ग्राम चौरसिल का 14 एकड़ जमीन पर बने मकान, पेड़ों, बंदी, कुएं का मुआवजा और लोगों को पुनर्वास नहीं दिया गया। बेतवा नदी परिषद के अधिकारियों ने वन विभाग को जमीन के बदले जमीन दी है, जो नियम विरुद्ध है।
ग्रामीणों ने अब राष्ट्रपति और उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, कानून मंत्री, पर्यावरण एवं वन मंत्री और कृषि मंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की उच्चस्तरीय कमेटी बनाकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों में कोई कार्रवाई नहीं होती है तो सभी किसान जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आंदोलन करने को बाध्य होंगे। ज्ञापन पर राघवेंद्र सिंह, रावराजा, महेंद्र सिंह, लखन, फूला, शिशुपाल, सीताराम पाल, समरथ, विंद्रावन, जगभान सिंह, लाखन सिंह आदि के हस्ताक्षर हैं।