फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंकपत्रों में नहीं रही एकरूपता

विज्ञापन
mark sheets, lalitpur news - फोटो : amarujala
विज्ञापन
ललितपुर। बुधवार को परिषदीय विद्यालयों में वितरित किए गए वार्षिक परीक्षाफल में एकरूपता नहीं दिखाई दी। किसी विद्यालय में अंकों की जगह ग्रेड दे दिए गए, तो किसी विद्यालय में अंकों का आवंटन किया गया। इस स्थिति में अंक पत्रों के पूूूर्णांक में भी अंतर में हो गया।  
विज्ञापन


परिषदीय विद्यालयों के वार्षिक परीक्षाफल तैयार करने को लेकर शिक्षक कई दिनों से माथापच्ची कर रहे थे। इसकी प्रमुख वजह अर्द्धवार्षिक के बाद वार्षिक परीक्षा कार्यक्रम शार्ट कर देने से विषयों की संख्या कम हो गई थी। यही नहीं, सत्र परीक्षा के दौरान भी सीमित विषय रखे गए। यहां तक शिक्षक बेफिक्र बने रहे, लेकिन जब अंकपत्र भरने की बारी आई तो विसंगति सामने आ गईं। इनका हल खोजने के लिए अफसरों ने छूटी परीक्षाओं को मौखिक परीक्षा के रूप में दर्शाने का निर्णय ले लिया।

वहीं, नैतिक शिक्षा जैसे विषयों में ग्रेड देने के मौखिक निर्देश हेड मास्टरों को दे दिए गए। इसका नतीजा यह हुआ कि  बुधवार को परिषदीय विद्यालयों में परीक्षाफल वितरण के दौरान विभिन्न ब्लाकों के अंक पत्रों में एकरूपता नजर नहीं आई। प्रधानाध्यापकों ने अंक पत्रों में मनमाने तरीके से अंकों का आवंटन कर दिया। नगर क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय चौबयाना में 1200 का पूर्णांक कर दिया। उर्दू विषय के कालम में अंक न देते हुए उसको काट दिया गया। वहीं, समाजोपयोगी उत्पादक कार्य में ग्रेड दे दिया गया।
विज्ञापन


विकासखंड बिरधा में नैतिक शिक्षा व समाजोपयोगी उत्पादक कार्य में ग्रेड दिया गया। सत्र परीक्षा के कालम में कृषि विज्ञान, पर्यावरणीय अध्ययन, शारीरिक शिक्षा, स्काउटिंग गाइडिंग, संगीत कला, नैतिक शिक्षा व समाजोपयोगी उत्पादक कार्य के अंक नहीं दिए गए, जिससे पूर्णांक सिमटकर 1000 हो गया।
 उधर, ब्लाक जखौरा में नैतिक शिक्षा और शारीरिक शिक्षा विषयों में ग्रेड दिया गया। ब्लाक मड़ावरा में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पूर्णांक 1000 रखा गया। यहां किसी भी विषय में ग्रेड नहीं दिए गए। इसके अलावा सभी विषयों की सत्र परीक्षा में अंक आवंटित किए गए। ब्लाक बार में उर्दू व स्काउटिंग विषय में अंक नहीं दिए गए हैं। नैतिक शिक्षा व समाजोपयोगी उत्पादक कार्य में ग्रेड दिया गया है। इस तरह बच्चों के हाथ में पृथक-पृथक अंक पत्र दिखे, जो चर्चा का विषय बना रहा। इस मामले में विभागीय अफसर बचाव मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं।

रिजल्ट कार्ड लेने में कम पहुंचे बच्चे
फसल कटाई के कारण स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति काफी कम देखी गई। ब्लाक मड़ावरा के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय गौना में नामांकित 100 के मुकाबले 35 बालिकाओं ने अंक पत्र प्राप्त किए। कमोवेश परिषदीय स्कूलों में यही हाल रहा।

इनका कहना है
स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने रिजल्ट कार्ड अपने विवेक से भरे हैं, इससे पहले जिला समन्वयक प्रशिक्षण ने संकुल प्रभारियों को रिजल्ट कार्ड भरने का तरीका बताया था।
विज्ञापन

आभा अग्रवाल, खंड शिक्षा अधिकारी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें