चिरगांव। साहित्यकारों की भूमि कही जाने वाली चिरगांव नगरी में बस स्टैंड ही नहीं है। इस रास्ते से होकर निकलने वाली निजी व सरकारी बसें केवल सवारी चढ़ाने या उतारने के लिए खड़ी होती हैं। इससे यहां से आसपास के शहरों की ओर जाने वाले यात्रियाें को भीषण गर्मी में भी सड़क किनारे खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ता है। मजबूरन यात्री टैंपो टैक्सी का सहारा लेकर यात्रा को मजबूर होते हैं।
नगर पालिका की ओर से नब्बे के दशक में कलेक्टर गंज में बस स्टैंड बनाया गया था। उस समय भांडेर, मोंठ, गुरसराय की ओर जाने वाली बसें यहां पर आती थीं। यहीं से सवारियां भरकर अपने गंतव्य को रवाना होती थीं। लेकिन धीरे-धीरे बसों के संचालन में कमी आई और टैंपो टैक्सी बढ़ गए। इसके अलावा यहां से जब से हाइवे बना है निजी बसों का रुकना नाम मात्र का भी नहीं रह गया। सरकारी बसें यहां से गुजरती तो हैं लेकिन रुक कर खड़ी नहीं होती।
वर्तमान में मोंठ की ओर जाने वाली बसें बैंक ऑफ इंडिया के सामने, गुरसराय की ओर जाने वाली बसें रामनगर तिराहे के पास, भांडेर की ओर जाने वाली बसें पहाड़ी चुंगी पर तथा झांसी की ओर जाने वाली बसें रामनगर तिराहे पर खड़ी होती हैं। यही हाल टैक्सी टंपों का भी है।
इस संबंध में नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी राम दुलार यादव ने बताया कि जगह के अभाव के कारण चिरगांव में बस स्टैंड नहीं बन पा रहा है। अगर प्रशासन जगह उपलब्ध करा दे तो जरूर इस ओर ध्यान दिया जा सकता है।