ललितपुर। नागपंचमी के अवसर पर भगवान शिव के गले के हार प्रिय नागदेवता पूरी आस्था और श्रद्घा के साथ पूूजे गए। जनपद में विभिन्न अखाड़ों में भी पुरानी परंपरा को निभाते हुए विधि पूर्वक पूजन अर्चन किया गया। पहलवानों ने पूजा कर करतब दिखाए।
नागपंचमी पर इस बार नागदेवता की पूजा तीस साल बाद विशेष योग में पूर्ण विधि विधान के साथ की गई। रविवार को सुबह से ही सपेरा बीन बजाते हुए पिटारा में नागदेवता को लेकर घर-घर चक्कर लगाने लगे। बीन की आवाज सुनकर पहले से ही पूजा की थाल तैयार किए महिलाएं घरों से बाहर आई और दरवाजे पर सपेरा द्वारा लाए नागदेवता की पूजा पूर्ण विधान विधान के साथ की। नाग देखने को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। नागदेवता को हल्दी, रोली व चावल से तिलक कर आटे बनी पूड़ी, खीर चढ़ाकर पूजन किया गया। इसके बाद नागदेवता को कच्चा दूध भी पिलाया गया।
अच्छी खासी चढ़ोत्तरी होने से सपेरों की भी चांदी रही।
वहीं महिलाओं द्वारा सपेरा को कपड़े भी दिए गए, ताकि वह उनके लिए मंगल कामनाएं करें और नागदेवता का विशेष आशीर्वाद प्राप्त हो सके। शहर में विभिन्न अखाड़ों में भी नागपंचमी पर नागदेवता की पूजा के साथ वर्षों से चली आ रही विशेष पूजा का परंपरागत आयोजन किया गया। भारत सेवा मंडल, गौशाला अखाड़ा, दुश्मन फटकार, लवकुश, रामराजा आदि अखाड़ों में पहलवानों ने लंगोट पहनकर विधिवत नीबू चढ़ाकर अखाड़ों की सुरक्षा के लिए विधिवत पूजन किया।
हालांकि बहुत से दम तोड़ चुके अखाड़ों में पहलवान तो नहीं होते लेकिन परंपरा का निर्वाह अब भी किया जा रहा है। यही हाल तालाबपुरा स्थित गौशाला अखाड़े का भी है, जहां शीलचंद जैन पप्पी ने अखाड़े की पूजा बिना किसी पहलवान के पुरानी परंपरा को बरकरार रखते हुुए की।