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Lalitpur News: लखनऊ से आई टीम ने की गायब गेहूं की जांच

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ललितपुर। थनवारा बीपैक्स समिति में किसानों से खरीदा गया दो हजार क्विंटल से अधिक गेहूं एफसीआई के गोदाम में जमा नहीं करने का मामला अब शासन तक पहुंच गया है। पीसीएफ के कार्यकारी निदेशक एवं मंडल स्तरीय टीम ने शुक्रवार को सहकारिता विभाग में गेहूं खरीद और जमा संबंधी दस्तावेज खंगाले। 31 जुलाई तक गेहूं जमा करने का एक और मौका दिया है। इसके बाद दोषियों के खिलाफ एफआईआर, निलंबन या फिर बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। दोषियों को बचाने वालों पर भी गाज गिर सकती है।
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पीसीएफ ने गेहूं खरीद के लिए गनगौरा स्थित बी-पैक्स थनवारा सोसायटी में केंद्र संचालित किया था। गेहूं की खरीद 17 मार्च से शुरू होकर 15 जून को खत्म हो गई थी। खाद्य एवं रसद विभाग के पोर्टल पर पांच जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार यहां कुल खरीद 73 किसानों से 5719.50 क्विंटल की गई, जिसके मुकाबले 3648.53560 क्विंटल गेहूं भारतीय खाद्य निगम के गोदाम में जमा किया गया। लेकिन, खरीद पूरी होने और जमा करने के समय के बाद भी 2070.96440 क्विंटल गेहूं जमा नहीं किया गया।
मामला संज्ञान में आने पर विभागीय अधिकारियों ने केंद्र के सचिव एवं केंद्र प्रभारी को लगातार लिखित एवं मौखिक रूप से निर्देशित किया। इसके बाद भी अवशेष गेहूं जमा नहीं किया गया। उन्हें कई नोटिस भी दिए गए, लेकिन अब तक गेहूं जमा नहीं कराया गया। जिला प्रबंधक ने पुलिस अधीक्षक को एफआईआर के लिए शिकायती पत्र भी दिया, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। अब यह मामला शासन तक पहुंच गया है।
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शासन के निर्देश पर शुक्रवार को पीसीएफ के कार्यकारी निदेशक मनोज कुमार दुबे ललितपुर पहुंचे। उनके साथ उपायुक्त एवं निबंधक अजीत कुमार भी थे। उन्होंने सहकारिता विभाग में जांच शुरू की और खरीद व जमा होने वाले गेहूं के संबंध में ब्योरा जुटाया। उन्होंने अधिकारियों को 31 जुलाई तक खरीद का बाकी गेहूं जमा कराने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी गेहूं जमा नहीं किया गया तो सचिव और केंद्र प्रभारी के खिलाफ एफआईआर एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने समिति के सचिव और केंद्र प्रभारी को भी जांच के दौरान बुलाया, लेकिन वह यहां भी नहीं पहुंचे।
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अभी गबन प्रमाणित नहीं हुआ है, लेकिन समय से खरीद का गेहूं जमा नहीं कराया जाना चिंताजनक है। विधिक राय ली गई है। यदि 31 जुलाई तक बकाया गेहूं जमा नहीं किया जाता है तो एफआईआर, निलंबन या बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी।
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-मनोज कुमार दुबे, कार्यकारी निदेशक, पीसीएफ
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