ललितपुर। परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को बांटे जाने वाले स्वेटर का टेंडर विभागीय अफसरों के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। मुख्य सचिव के निर्देश पर जिले के आला अधिकारियों ने निरस्त टेंडर के प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। अपर जिलाधिकारी का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जिले के परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत 1 लाख 74 हजार 197 बच्चों को स्वेटर वितरित किया जाना है। लेकिन, इसका टेंडर अभी तक नहीं हो पाया है। इसे दो बार निरस्त किया जा चुका है। तेइस नवंबर को तीसरी बार निकाले गए टेंडर को खोला जाएगा। इसी दिन चयनित ठेकेदार को वर्कआर्डर जारी किया जाएगा, जिससे कि स्वेटर वितरण का काम तेजी से हो सके। जनपद में स्वेटर टेंडर में हो रही देरी के पीछे कारण वीडियो कांफ्रेसिंग में खुल गया है। डीएम ने सारी स्थिति से अवगत करा दिया है। इस पर मुख्य सचिव ने टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। इससे बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों में खलबली मच गई। पहली बार टेंडर डालने वाले ठेकेदारों में अधिकतर पात्रता पूरी नहीं कर पाए थे। इस कारण इसे दूसरी बार निकाला गया। इस टेंडर प्रक्रिया में 49 फार्म डाले गए थे, इनमें तीन ही दावेदार शेष रह गए थे। जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ला ने इस टेंडर में प्रतिस्पर्धी की संख्या कम देख उसे निरस्त कर दिया था। इस दौरान पाया कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार वर्मा कुछ दिनों के लिए अवकाश पर चले गए थे और उनका डोगल दूसरे अधिकारी इस्तेमाल करते रहे। इसे जिलाधिकारी ने गंभीर अनियमितता मानते हुए पूरे प्रकरण से शासन को अवगत करा दिया, जिससे शासन ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस टेंडर प्रक्रिया में यह भी आरोप लग रहे हैं कि विभागीय अफसर चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाना चाहते थे। अब इन बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
23 नवंबर को स्वेटर का टेंडर खुल जाएगा और इसी दिन वर्कआर्डर जारी कर दिया जाएगा। पूर्व का टेंडर पहले ही निरस्त किया जा चुका है। वीडियोकांफ्रेसिंग में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।
- मनोज कुमार वर्मा
बीएसए
टेंडर निरस्त हो चुका है, इसमें किसी प्रकार का गबन नहीं हुआ है। हालांकि, इसकी जांच कराई जा रही है, जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अनिल कुमार मिश्र
अपर जिलाधिकारी