ललितपुर। विंध्याचल पर्वत की तलहटी में बसे जनपद में खनिज तत्वों का बड़ा भंडार है। यहां पाया जाने वाला लाल ग्रेनाइट अपना खास महत्व रखता है। इसका कारण इस ग्रेनाइट की मांग विदेश तक होना है। यह लाल ग्रेनाइट पत्थर ताइवान, दक्षिण कोरिया, रूस और जापान तक जाता है। इन देशों में इस ग्रेनाइट पत्थर को वास्तु शास्त्र के अनुसार मकान में लगाना शुभ माना जाता है।
यहां खनिज तत्वों की भरमार है, जिसमें सोना, आयरन और रॉक फॉस्फेट आदि शामिल है। उप खनिज के रूप में मिलने वाला ग्रेनाइट पत्थर भी यहां मौजूद है, जोकि ब्लॉक जखौरा क्षेत्र के ग्राम मड़वारी, कालापहाड़ और दुर्जनपुरा क्षेत्र में भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इस लाल ग्रेनाइट को विदेश के लोग खूब पसंद करते हैं। वह इस ग्रेनाइट को अपने भवन व मकान में लगाते हैं। अधिकारियों के मुताबिक लाल ग्रेनाइट ताइवान, दक्षिण कोरिया, रूस, जापान तक जाता है। वहां के लोग लाल ग्रेनाइट पत्थर को वास्तु अनुसार लगाते हैं और उसे घर में लगाना शुभ मानते हैं। यही कारण है कि इन देशों में यहां के लाल ग्रेनाइट पत्थर की मांग अधिक है। विदेश में यह पत्थर झांसी रेड ग्रेनाइट के नाम से प्रचलित है। इसके साथ जनपद के भूगर्भ में सैंड स्टोन की कई वैरायटी पाई जाती है।
मूर्ति बनाने के लिए डायस्पोर पत्थर भी भरपूर
यहां के भूगर्भ में ग्रेनाइट और इमारती पत्थरों की मौजूदगी के साथ डायस्पोर पत्थर भी पाया जाता है। यह पत्थर पुराधनकुआं व तालबेहट क्षेत्र में पाया जाता है। इसका प्रयोग मुख्यत: कॉस्मेटिक पदार्थ और मूर्ति बनाने में किया जाता है। वर्तमान में गणेशजी व नवरात्र में मां दुर्गा की मूर्तियां इसी पत्थर के पाउडर से तैयार होती हैं।
क्वार्ज पत्थर की वैरायटी जनपद में मिलती है। इसका उपयोग मुख्यत: कांच बनाने के लिए किया जाता है। यह पत्थर कैलगुवां व तालबेहट तहसील क्षेत्र में मिलता है।
खनिज और उप खनिज का काफी भंडार है। भूगर्भ में तरह-तरह के खनिज व उप खनिज मिलते हैं, जिसमें लाल ग्रेनाइट काफी खास है। इसकी मांग खूब है और यह विदेश जाता है। विदेशी लोग इस लाल पत्थर को सुंदर होने के साथ वास्तुशास्त्र के अनुसार शुभ मानते हैं। वे इसे अपने भवन व मकानों में लगाना पसंद करते हैं।
अमितोष वर्मा, जिला खान अधिकारी