ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग ने करीब दो साल पहले जिले में कैंसर रोगियों की जांच करने का निर्णय लिया था, लेकिन अब तक जांच फाइनल नहीं हो सकी है। ऐसे में तय नहीं हो पा रहा है कि जिले में कैंसर के कितने रोगी हैं। शासन स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण योजनाएं धरातल पर नहीं आ रही हैं। कैंसर रोगियों को चिह्नीकरण करने का उद्देश्य था कि कैंसर के रोगियों की पहचान हो जाने के बाद उन्हें समुचित उपचार मुहैया कराया जाए। इसमें मुख कैंसर, स्तन और बच्चदानी के कैंसर की जांच करने की जिम्मेदारी थी, लेकिन कैंसर रोगियों की पहचान नहीं हो पाई। ऐसे में संभावित रोगियों की पुष्टि नहीं हो रही है।
अप्रैल 2018 में विभाग ने कैंसर रोगियों की जांच की सुविधा शुरू की थी। रोगी का चिह्नीकरण का कार्य आशा और एएनएम को सौंपा गया था। इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया गया, लेकिन अब तक कैंसर रोगियों का चिह्नीकरण नहीं किया जा सका है। चिह्नीकरण के लिए आशाओं को घर- घर जाकर परिवार के तीस वर्ष के ऊपर के सदस्यों का स्वास्थ्य ब्योरा जुटाना था। इसमें मुंह का कैंसर, बच्चादानी और स्तन का कैंसर के अलावा मधुमेह व रक्तचाप के लक्षण शामिल हैं। यदि किसी व्यक्ति में उक्त लक्षण पाए गए तो उन्हें जिला अस्पताल में एनसीडी सेल में जांच कराने के लिए आना था। अगर कैंसर के शुरूआती लक्षण पाए जाते तो शरीर से कुछ टुकड़ा निकालकर जांच के लिए झांसी और मुंबई भेजा जाना था।
कैंसर रोग की जांच कर मरीजों की स्क्रीनिंग का काम चल रहा है। शीघ्र ही मरीजों की संख्या सामने आ जाएगी।
- डा. मुकेश दुबे, नोडल अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग