किसान अपनी उपज गांव के पास ही बेच सके, इसके लिए बुंदेलखंड पैकेज से करीब 26 करोड़ रुपये खर्च करके शासन ने जिले में 18 जगह ग्रामीण अवस्थापना केंद्र (कृषि उपज मंडी) बनवाए हैं। लेकिन व्यवस्थाओं में झोल के कारण ये अभी तक चालू नहीं हो पाईं हैं। ये केंद्र करीब दो साल से बनकर तैयार खड़े हैं, जिन्हें देख किसान खुद को ठगा सा महसूस करता है।
शहर के पास अमरपुर गांव में नवीन गल्ला मंडी का निर्माण 80 एकड़ जमीन में किया गया है। मंडी तकरीबन तैयार है, लेकिन इसका उपयोग अभी शुरू नहीं हो सका है। मंडी समिति के अधिकारियों की मानें तो आचार संहिता हटने के बाद इस मंडी का शुभारंभ किया जाएगा। आचार संहिता की परेशानी केवल एक मंडी तक ही सीमित है। जबकि जनपद में विभिन्न स्थानों पर 18 और मंडियां करीब 84 एकड़ जमीन पर बनी हैं। सभी मंडियां दो साल पहले बनकर तैयार हो चुकी हैं। लेकिन अभी तक यहां कृषि उपज खरीदने का काम शुरू नहीं हुआ।
इन मंडियों की दुकानों को किराए पर भी दिया जा चुका है। ग्रामीणों की मानें तो गल्ला व्यापारियों ने इन दुकानों को अपना गोदाम बना लिया है, इस वजह से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए जिला मुख्यालय आना पड़ता है। कुछ किसान मंडी के बाहर कुछ दुकानदारों को अपनी उपज बेचते हैं, जिससे मंडी शुल्क का नुकसान होता है।
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यहां बनी मंडियां
बुंदेलखंड विकास पैकेज के तहत विशिष्ट मंडी स्थल अमरपुर के अलावा ग्रामीण इलाकों में बालाबेहट, बिरधा, थनवारा, पाली, लखनपुरा, नगवांस, पंचमपुर, खितवांस, नाराहट, बानपुर, मार्रोली, कैलगुवां, सिलावन, सैदपुर, सौजना, मड़ावरा, बरौदा डांग व कुम्हैड़ी में मंडियों का निर्माण किया गया है।
जिन मंडियों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, वहां पर दुकानों को किराए पर दिया जा चुका है। किसानों को अगर वहां अनाज बेचने की सुविधा नहीं मिल रही है, तो इसकी जांच की जाएगी। अमरपुर स्थित नवीन गल्ला मंडी को आचार संहिता के खत्म होते ही शुरू किया जाएगा।
- अनिल कुमार, मंडी सचिव