18 वर्ष की आयु तक के लड़कों के स्वास्थ्य परीक्षण और उनकी बीमारी का समय से उपचार कराने के लिए ग्रामीण इलाकों में चलाई जा रही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। इस योजना के तहत प्रत्येक ब्लॉक में दो स्वास्थ्य टीम काम कर रही हैं, लेकिन गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों को जिला अस्पताल तक लाने में सक्षम नजर नहीं आ रही हैं। 21 नवंबर से 20 दिसंबर तक एक माह में 1,793 बच्चों को रेफर किया गया जिनमें से मात्र 31 बच्चे ही जिला अस्पताल तक पहुंच पाए हैं। गंभीर बीमारी से ग्रसित 239 बच्चे जिला अस्पताल नहीं पहुंच पाए हैं।
जनपद में कुल छह ब्लॉक हैं, इन ब्लॉक स्तर पर काम कर रही टीम का कार्य क्षेत्र में बच्चों का चिकित्सीय परीक्षण करना है। उक्त टीम की जिम्मेदारी है कि वह मामूली बीमारी वाले बच्चों को मौके पर व ब्लॉक स्तर पर उपचार कराएं और गंभीर बीमारी वाले बच्चों को जिला अस्पताल रेफर करके प्रत्येक सप्ताह के शनिवार को जिला अस्पताल भेजें। एक वर्ष में आंगनवाड़ी केंद्रों पर दो बार और विद्यालयों में एक बार परीक्षण करने का प्रावधान है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के पिछले एक माह 21 नवंबर से 20 दिसंबर तक के विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो ब्लॉक की टीमों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों के कुल 210 विद्यालयों और 152 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 36 हजार 343 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। परीक्षण में कुल 3,306 बच्चे बीमार पाए गए, इनमें 1,867 बीमार बच्चों को मौके पर ही उपचार दिया गया शेष 1,793 बच्चों को जो गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं उन्हें ब्लॉक स्तर व जिला अस्पताल के रेफर कर दिया गया। इनमें से 1,554 बीमार बच्चों को उपचार मिल गया। मात्र 31 बच्चे ही उपचार के लिए जिला अस्पताल तक पहुंचाए गए। वहीं 239 बच्चे अब भी उपचार के लिए जिला अस्पताल तक नहीं पहुंच पाए हैं। यह आंकड़ा केवल एक माह का है, यदि इस वित्तीय वर्ष की बात करें तो 01 अप्रैल 2016 से दिसंबर 2016 तक कुल 10 हजार 498 बच्चों को उपचार के लिए ब्लॉक व जिला अस्पताल के लिए रेफर किया गया, इनमें से अब तक कुल 8,345 बीमार बच्चों को ही उपचार मिल सका है। दो हजार से अधिक बीमार बच्चे अभी भी उपचार से दूर हैं। कुल मिलाकर लापरवाही बरती जा रही है।
बीमार बच्चों का किया उपचार
बीमार बच्चों को जिला मुख्यालय तक पहुंचाने में ब्लॉक स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है, लेकिन जो बीमार बच्चे विभिन्न ब्लॉक स्तर से रेफर होकर जिला मुख्यालय आ रहे हैं, उनके समय से उपचार मिल रहा है। इस संबंध में जिला मुख्यालय पर तैनात आरबीएसके योजना प्रबंधक डा. दीपक अग्निहोत्री बताते हैं कि 26 नवंबर से 11 फरवरी तक ब्लॉक से जिला अस्पताल रेफर होकर आने वाले 86 बीमार बच्चों को उपचार उपलब्ध करा दिया गया है। इनमें से करीब तीन दर्जन बच्चों को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है। जिला मुख्यालय आने वाले उक्त 86 बच्चों में बिरधा ब्लॉक से 39 बच्चे, महरौनी से 22 बच्चे, मड़ावरा से 10 बच्चे, जखौरा से 11 बजे व तालबेहट और बार से मात्र दो-दो बच्चे की जिला अस्पताल तक पहुंचाए गए हैं। बीमार बच्चों में करीब 30 नेत्र रोग से ग्रस्त हैं और दो दर्जन बच्चे कान व गले की बीमारियों से ग्रसित हैं। अन्य बच्चे अन्य बीमारियों से ग्रसित हैं।
तीन को मिली निशुल्क सर्जरी
इनमें से तीन गंभीर बीमार बच्चों की मेडिकल कॉलेज झांसी में निशुल्क सर्जरी कराई गई है। विनीता पुत्र परशुराम निवासी ग्राम साढूमल ब्लॉक महरौनी के कान में मवाद बनती थी, पूर्व में दवाइयों के जरिये उपचार किया गया, लेकिन आराम नहीं मिलने पर बच्ची के कान की सर्जरी की गई है, जो अब ठीक है। वहीं दिनेश पुत्र प्रेम कुशवाहा निवासी बिरधा की आंख में जनजात बीमारी थी, जिसकी निशुल्क सर्जरी की गई। इसके अलावा रीना निवासी तालबेहट के हाथों की अंगुलियों की हड्डी खराब थी, जिसको सर्जरी के जरीए ठीक कराया गया है।
डीएम ने शासन को भेजा पत्र
इस योजना के तहत निशुल्क होने वाले उपचारों के अलावा भी गंभीर बीमारियों का उपचार कराने के लिए आरोग्य निधि का भी प्रावधान है। ग्राम सिंदवाहा में रहने वाला छह वर्षीय बालक अभिषेक पुत्र कोमल सिंह जन्म से ही दिमागी बीमारी से ग्रसित है। इसके उपचार के लिए जिलाधिकारी डा.रुपेश कुमार ने शासन को पत्र भेजकर आरोग्य निधि से 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की स्वीकृति मांगी है।
बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में गंभीर बीमारियों वाले बच्चों को उचित इलाज मुहैया कराया जा रहा है। जिन बच्चों को इलाज नहीं मिला, उन्हें उचित इलाज की व्यवस्था कराई जाएगी। डा प्रताप सिंह सीएमओ