तालबेहट। युवा जलवायु परिवर्तन साइकिल संदेश यात्रा रविवार को तालबेहट पहुंची। इसका उद्देश्य युवाओं, किसानों और ग्रामीण समुदाय को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति जागरूक करना है। यह यात्रा झरर घाट से शुरू होकर कड़ेसरा कला होते हुए तालबेहट पहुंची। बताया गया कि यात्रा 10 अक्तूबर को छतरपुर जिले के बक्सवाहा स्थित बढ़गढ़ धाम पहुंचेगी।
कड़ेसरा कला के तालाब पर नगर पंचायत तालबेहट के अध्यक्ष पुनीत सिंह ने साइकिल यात्रियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब गांवों और किसानों के जीवन में स्पष्ट दिख रहा है। बदलते मौसम से खेती और जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं। जल एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। युवाओं ने ग्रामीणों को अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और सूखे के प्रभावों की जानकारी दी। किसानों ने बताया कि मौसम में बदलाव से फसलों की बोआई और कटाई का समय प्रभावित हो रहा है। समय पर बारिश न होने या अचानक तेज बारिश से फसलों को नुकसान हो रहा है। किसानों के अनुसार, बारिश की अनिश्चितता से खेती अधिक जोखिमपूर्ण हो गई है। संवाद में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर भी चर्चा हुई।
यात्रा इसके बाद तालबेहट स्थित महादेव मंदिर पहुंची। यहां जल, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर एक गोष्ठी आयोजित की गई। नमामि गंगे परियोजना के समन्वयक केतन दुबे ने इसमें अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए जल स्रोतों का संरक्षण जरूरी है। तालाब, नदियां और अन्य जल स्रोत ग्रामीण जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।
यात्रा में शामिल युवाओं ने लोगों से पानी की बर्बादी रोकने की अपील की। उन्होंने तालाबों और अन्य जल स्रोतों को संरक्षित रखने को कहा। पेड़-पौधों की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने का आग्रह किया। युवाओं ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का संबंध पानी, खेती और रोजगार से है। यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। यात्रा में प्रशासक ज्ञान सिंह यादव सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।