- मानसिक और बौद्धिक विकास होगा बेहतर
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते समय सामान्य ज्ञान, समसामयिक घटनाओं के बारे में कई किताबें पढ़नी पड़ती हैं। जिसमें काफी समय लगता है। अब स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य कर देने से इन बच्चों के मानसिक व बौद्धिक विकास के साथ ज्ञान में बढ़ोतरी होगी।
हाल ही में शासन ने बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के मानसिक व बौद्धिक विकास को बढ़ाने व स्क्रीन टाइम कम करने के लिए समाचार पत्र का वाचन करने के निर्देश दिए हैं। शासन की इस पहल को लेकर शिक्षकों सहित बच्चों के अभिभावकों ने इसे सकारात्मक बताया है। शिक्षकों ने कहा कि इससे छात्र-छात्राओं, युवाओं में कई सकारात्मक परिवर्तन और सुधार देखने को मिलेंगे। यह केवल जानकारी बढ़ाने का माध्यम नहीं है। व्यक्तित्व निर्माण का एक प्रभावी साधन है। समाचारपत्र पढ़ने युवाओं, छात्रों को देश दुनिया की घटनाओं, सरकारी योजनाओं, विज्ञान, अर्थव्यवस्था, खेल और सामाजिक मुद्दों की जानकारी मिलती है। इससे छात्रों में सकारात्मक परिवर्तन, भाषा कौशल में सुधार और सामाजिक जागरुकता बढ़ेगी। अखबार पढ़ने से उन्हें देश-दुनिया की घटनाओं की जानकारी मिलेगी जोकि उनके व्यक्तित्व विकास में सहायक होगी। यह बात शिक्षकों ने बताते हुए कही। साथ में यह भी कहा कि शिक्षा का प्रभाव व महत्व केवल विद्यालय में पढ़ना, लिखना और गणित सीखने तक सीमित नहीं है। बल्कि औपचारिक शिक्षा का उद्देश्य बेहतर इंसान बनने और बेहतर समाज का निर्माण करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्राप्त करना है। विद्यालय में समाचार पत्र पढ़ने की पहल शुरू होने से बच्चों का मानसिक व बौद्धिक विकास तो बढ़ेगा ही भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उनके ज्ञान में बढ़ोतरी होगी।
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कैप्शन - इंद्रपाल सिंह
बच्चे हमारा भविष्य हैं, उनको अखबार से जोड़ने के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा उनका मानसिक विकास है। पहले बच्चे अपने बड़ों के साथ बैठकर अखबार पढ़ लेते थे। अब उनके हाथ में मोबाइल होता है उनके भीतर कई तरह की विकृतियां पैदा कर रहा है। अखबार में सिर्फ समाचार नही आते, उसमें बौद्धिक विकास की सामग्री आती है जिसे मल्टी विटामिन भी कह सकते हैं इसलिए इसका अध्ययन जरूरी है।
इंद्रपाल सिंह निरंजन, शिक्षक
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कैप्शन - सचिन निरंजन
आज जब डिजिटल माध्यमों पर हद से ज्यादा निर्भरता बढ़ गई है और फेक न्यूज का तेजी से प्रचार-प्रसार हो रहा है, तब अखबार ही जागरुकता का सबसे बड़ा जरिया है। जो लोग प्रतिदिन अखबार पढ़ते हैं, उनका शब्दज्ञान बेहतर हो जाता है। उनमें पढ़ने की आदत तो विकसित होती ही है, वे अपने विचारों को अधिक कुशलतापूर्वक अभिव्यक्त कर पाते हैं। विद्यालयों में समाचार पत्र का वाचन की पहल शुरू होने से छात्रों को काफी मदद मिलेगी। उनका शब्दज्ञान बेहतर होगा साथ बैद्धिक और तार्किक क्षमता बढ़ेगी।
- सचिन निरंजन